चंडीगढ़। चंडीगढ़: हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने आगामी वित्त वर्ष के लिए दायर वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) याचिकाओं की सार्वजनिक सुनवाई के दौरान राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) हानियों को हर हाल में कम किया जाए और जिन गांवों में अब तक 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है, वहां तुरंत निर्बाध आपूर्ति शुरू की जाए।
पंचकूला स्थित एचईआरसी कोर्ट रूम में गुरुवार को चार घंटे तक चली इस सार्वजनिक सुनवाई में उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) द्वारा प्रस्तावित नई बिजली दरों और वित्तीय अनुमानों पर विस्तार से चर्चा की गई। सुनवाई में विभिन्न श्रेणियों के बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
सुनवाई की अध्यक्षता एचईआरसी के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने की, जबकि आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग और शिव कुमार भी उपस्थित रहे। इस दौरान यूएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक मनी राम शर्मा और डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह सहित डिस्कॉम्स और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
डिस्कॉम्स ने आयोग को बताया कि वर्तमान में यूएचबीवीएन के अंतर्गत 3,393 गांवों और डीएचबीवीएन के अंतर्गत 2,517 गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने शेष गांवों में भी शीघ्र चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वित्त वर्ष 2026–27 के लिए दायर एआरआर में डिस्कॉम्स ने कुल ₹51,156.71 करोड़ की राजस्व आवश्यकता का अनुमान प्रस्तुत किया। वहीं, नए वित्त वर्ष में ₹1,605.16 करोड़ के अधिशेष के साथ कुल अनुमानित राजस्व ₹52,761.87 करोड़ बताया गया। इसके बावजूद, वित्त वर्ष 2024–25 के घाटे को समायोजित करने के बाद कुल ₹4,484.71 करोड़ का राजस्व अंतर बने रहने की बात कही गई।
आयोग ने स्पष्ट किया कि एटीएंडसी हानियों में किसी भी सूरत में बढ़ोतरी स्वीकार्य नहीं होगी। साथ ही, वित्तीय बोझ कम करने के लिए कम ब्याज दरों पर ऋण जुटाने और औसत आपूर्ति लागत (एसीएस) तथा औसत राजस्व प्राप्ति (एआरआर) के बीच अंतर घटाने के निर्देश दिए गए। डीएचबीवीएन से अब तक लिए गए ऋणों का विस्तृत ब्यौरा भी मांगा गया।
डिस्कॉम्स ने बताया कि यूएचबीवीएन की वितरण हानियां 9.33 प्रतिशत और डीएचबीवीएन की 10.26 प्रतिशत हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर देते हुए आयोग ने कहा कि जब देश हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो हरियाणा को भी इसमें अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। इस पर यूएचबीवीएन के मुख्य अभियंता ने बताया कि वर्तमान में राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हरित ऊर्जा स्रोतों से है।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से प्राप्त बिजली को लेकर भी आयोग ने जानकारी ली। बताया गया कि हरियाणा को बीबीएमबी से 846.14 मेगावाट बिजली लगभग 84 पैसे प्रति यूनिट की दर से मिल रही है। 30 नवंबर 2025 तक राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 17,003.91 मेगावाट थी, जबकि कुल बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 83,40,034 है।
सार्वजनिक सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों और अभ्यावेदनों को आयोग ने विधिवत दर्ज किया। उपभोक्ताओं को संबोधित करते हुए एचईआरसी अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने भरोसा दिलाया कि आयोग उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया कि आगे भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएंगी—गुरुग्राम में 10 फरवरी, पानीपत में 24 फरवरी, हिसार में 25 फरवरी और यमुनानगर में 2 मार्च को प्रस्तावित हैं।













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