मुख्यमंत्री की घोषणा के कई वर्ष बाद भी गांव चिकन में स्वास्थ्य केंद्र का प्रस्ताव किया रद्द,
कालका के खेड़ा वाली में नर्सिंग कॉलेज के उद्घाटन के 11 महीने बाद भी नर्सिंग की कक्षाएं आरंभ नहीं हो पाई है, कालका के टिपरा में 200 बेड का हॉस्पिटल नहीं बना, पिंजौर अस्पताल भवन का निर्माण कई वर्षों से अधूरा पड़ा है, मोरनी में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं बने
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
कालका/पिंजौर 17 सितंबर। शिवालिक विकास मंच प्रदेश अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी पूर्व सचिव विजय बंसल एडवोकेट ने वर्तमान बीजेपी सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं और सरकार के दावों के बीच कालका विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी तस्वीर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने बताया कि कालका के टीपरा में प्रस्तावित 200 बेड के अस्पताल को लेकर मुख्यमंत्री को बार-बार ज्ञापन दिए जाने के बावजूद एक साल बाद भी परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की जमीन के लिए नगर परिषद कालका को 17 करोड़ रुपये की राशि जमा करवा चुका है, फिर भी जमीन का आवंटन अब तक क्यों नहीं हुआ?
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि करोड़ों रुपये जमा होने के बावजूद अस्पताल की जमीन का मामला आगे नहीं बढ़ना सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। क्षेत्रवासियों को भी अस्पताल की घोषणा से उन्हें उम्मीद जगी थी कि बेहतर इलाज के लिए उन्हें कालका-पिंजौर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि दूसरी ओर, पिंजौर अर्बन पॉलीक्लिनिक अस्पताल भवन का निर्माण भी वर्षों से धीमी रफ्तार से चल रहा है। निर्माण की सुस्त गति का सीधा असर लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। सवाल उठ रहा है कि जब स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत इतनी स्पष्ट है तो निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा क्यों नहीं करवाया जा रहा?
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि केवल इतना ही नहीं पिंजौर ब्लॉक के गांव चिक्कन में प्रस्तावित स्वास्थ्य केंद्र का मामला भी सरकारी दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव रद्द कर दिया, जबकि पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई जमीन को बरसाती नाले की जमीन बताया गया है। जमीन उपलब्ध न हो पाने के कारण रायतन क्षेत्र में अभी तक स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन पाया है।
विजय बंसल ने बताया कि इसके अलावा मोरनी में प्रस्तावित सात हेल्थ सब-सेंटर भी वर्षों से लंबित हैं। पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए ये केंद्र बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा का महत्वपूर्ण साधन बन सकते थे, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद निर्माण का इंतजार जारी है।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि कालका के गांव खेड़ा वाली में लड़कियों के लिए बनाया नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अक्टूबर 2025 में वर्चुअल उद्घाटन किया था लेकिन अभी तक 11 महीने बाद भी नर्सिंग कॉलेज में कक्षाएं आरंभ नहीं हो पाई हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 40 करोड़ रुपए की लागत से नर्सिंग कॉलेज का भवन का निर्माण किया गया लेकिन यहां के लिए स्टाफ की भर्ती ही नहीं की गई। इस कॉलेज में नीट परीक्षा के माध्यम से बीएससी नर्सिंग की ट्रेनिंग दी जानी हैं।
विजय बंसल एडवोकेट ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अब सवाल सिर्फ घोषणाओं का नहीं, जवाबदेही का है। क्षेत्रवासी पूछ रहे हैं—घोषणाएं कब धरातल पर उतरेंगी, 17 करोड़ जमा होने के बावजूद जमीन कब मिलेगी और लंबित स्वास्थ्य परियोजनाओं की अंतिम समयसीमा सरकार कब तय करेगी?
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि हरियाणा की नंबर एक विधानसभा कालका के पिंजौर शहर में प्रयाप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण लोगों को अपने इलाज के लिए पंचकूला चंडीगढ़ या प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी विषय पर लोगों की कई वर्षों पुरानी मांग पर दो नेशनल हाईवे और दून और रायतन क्षेत्र के लगभग 100 गांवो से घिरे हुए पिंजौर शहर की लाखों की आबादी के मध्य नजर सरकार द्वारा ब्रिटिश काल के सबसे पुराने प्राइमरी हेल्थ सेंटर को अपग्रेड कर पॉलीक्लिनिक अस्पताल भवन बनाने का कार्य आरंभ किया था। लेकिन पिछले लगभग 5 वर्षों से अस्पताल भवन का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। इसी विषय में विजय बंसल एडवोकेट ने गत 19 मई 2025 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को ज्ञापन भेजा था।
विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि पिंजौर से शिमला और पिंजौर से नालागढ़ की और दोनों नेशनल हाईवे पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में जाने वाले वाहनों के कारण यहां पर अक्सर छोटी बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन यहां कोई बड़ा अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर न होने के कारण किसी भी आपात स्थिति में घायल मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ या पंचकूला रेफर कर दिया जाता है। जहां मरीज को ले जाने में काफी समय बर्बाद हो जाता है इस दौरान घटना में कई घायल अपनी जान भी गवा चुके हैं। इतना ही नहीं अन्य बीमारी के मरीजों के लिए भी यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं नाम मात्र को ही है इसलिए अर्बन पॉलीक्लिनिक भवन का निर्माण शीघ्र अति शीघ्र किया जाना आवश्यक है।















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