बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़/पंचकूला, 17 सितम्बर: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के कॉलेज कैडर में पक्के तौर पर नियुक्त कॉलेज प्रोफेसरों को बड़ी राहत देते हुए 24 दिसंबर 2025 को जारी की गई विवादित सीनियोरिटी लिस्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील के. नेहरा ने अदालत के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष रखा।
क्या है पूरा मामला?
मामले के मुख्य याचिकाकर्ता रविंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2001, 2004 और 2011 में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा की नियमानुसार प्रक्रिया के तहत कॉलेज कैडर में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियमित रूप से नियुक्त हुए थे। इनमें से कुछ पदोन्नत होकर एसोसिएट प्रोफेसर भी बन चुके हैं।
दूसरी ओर, कुछ ऐसे कर्मचारी थे जिनकी शुरुआत में नियुक्ति एडहॉक आधार पर हुई थी। इन्हें काफी बाद में नियमित किया गया था। लेकिन बाद में राज्य सरकार के आदेशों के तहत इन एडहॉक कर्मचारियों को वर्ष 1996 से पिछली तारीख से नियमित घोषित कर दिया गया।
विवाद का मुख्य कारण
एडहॉक सेवा को सीनियोरिटी में जोड़ना:
पूर्व में हाईकोर्ट यह फैसला दे चुका है कि एडहॉक सेवा काल को सीनियोरिटी निर्धारण के लिए नहीं जोड़ा जा सकता।
बिना पक्ष सुने फैसला:
एक अन्य मामले में सहमति के आधार पर पारित आदेश के तहत राज्य सरकार ने एडहॉक सेवा को सीनियोरिटी में गिनने की बात मान ली। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे इस फैसले के सीधे प्रभावित पक्ष थे, लेकिन उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
सीनियोरिटी लिस्ट में फेरबदल:
इसी आधार पर विभाग ने 24 दिसंबर 2025 को अंतिम सीनियोरिटी लिस्ट जारी कर दी, जिसमें नियमित रूप से नियुक्त हुए शिक्षकों को पीछे करते हुए एडहॉक से पक्के हुए कर्मचारियों को उनके ऊपर वरिष्ठता दे दी गई।
अदालत का आदेश
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बरार की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के तर्कों से सहमति जताई और 24 दिसंबर 2025 की विवादित सीनियोरिटी लिस्ट के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अदालत ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के भी आदेश दिए हैं।














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