September 17, 2026 10:29 pm

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चीनी मिल उद्योग के अतिरिक्त मुनाफे में गन्ना किसानों की अनिवार्य हिस्सेदारी के लिए कानून बनाया जाए: रतन मान

गन्ने का भाव 650 रुपए प्रति क्विंटल तय किया जाए
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़,17 सितंबर(): संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य एवं भारतीय किसान यूनियन हरियाणा (भाकियू) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने भाजपा नेतृत्व वाली मोदी सरकार द्वारा बाजार में लोगों की लूट को बढ़ावा देने तथा चीनी की कीमतों में लगातार हो रही अनुचित बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि गत 20 जुलाई से भारत में चीनी का खुदरा मूल्य ₹48.18 प्रति किलोग्राम था। इसके बाद 20 अगस्त को यह बढ़कर ₹55.70, 21 अगस्त को ₹58.23 और 15 सितंबर को ₹62 प्रति किलोग्राम हो गया। कई बाजारों में चीनी का भाव ₹70 प्रति किलोग्राम से भी अधिक पहुंच गया है। वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान देश में चीनी का औसत उत्पादन 3.2 से 3.4 करोड़ मीट्रिक टन रहा है। मोदी सरकार द्वारा गन्ने को एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई। जिसके चलते एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल का रुझान लगातार बढ़ा है। जिसके चलते  एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ऊंची कीमतों के कारण चीनी मिलों और थोक व्यापारियों को भारी मुनाफा हो रहा है। जबकि गन्ना किसानों को इसका कोई उचित लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। किसान नेता रतन मान ने इस वर्ष चीनी से होने वाले मुनाफे का 50% हिस्सा किसानों के साथ साझा किए जाने की मांग उठाई। मौजूदा चीनी कीमतों में बढ़ोतरी से गन्ना किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ उन्हें अपनी उपज यानी गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। दूसरी तरफ उपभोक्ता के रूप में उन्हें महंगी चीनी भी खरीदनी पड़ रही है। मान ने कहा कि देशभर के गन्ना उत्पादक किसान कॉरपोरेट और सहकारी चीनी मिल लॉबी, कॉरपोरेट व्यापारियों तथा मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों से नाराज चल रहे हैं। गन्ना किसान विभिन्न क्षेत्रों में बंद पड़ी सहकारी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के साथ साथ तथा गन्ने के भाव में बढ़ोतरी की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं। मान ने जानकारी देते हुए बताया कि आने वाली 4 अक्टूबर को गन्ना बाहुल इलाके यमुनानगर में भाकियू के तत्वाधान में किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इस किसान महापंचायत में प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत व राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह सहरावत सहित कई बड़े किसान नेता शिरकत कर रहे है।किसान नेता मान ने भारत के किसानों की उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और कृषि तथा फैक्ट्री मजदूरों की आय में भी बड़े पैमाने पर सुधार होगा। इससे औद्योगिकीकरण में आई गिरावट को रोकने, कृषि संकट से निपटने, ग्रामीण बेरोजगारी को कम करने तथा मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकने में अवश्य मदद मिलेगी। भाकियू ने मोदी सरकार से मांग की है कि वह कॉरपोरेट हितों के सामने झुकना बंद करे और चीनी बाजार में चल रही सट्टेबाजी तथा अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए। ताकि चीनी मिल लॉबी किसानों और उपभोक्ताओं का शोषण करके भारी मुनाफा नहीं कमा सकेगी।

प्रमुख मांगें:

1. गन्ने का SAP बढ़ाकर 650 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए।

2. चीनी मिल उद्योग के  मुनाफे में गन्ना किसानों की अनिवार्य हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाया जाए।

3. चीनी के दामों में हो रही अनुचित बढ़ोतरी और बाजार की लूट पर रोक लगाई जाए।

4. बंद पड़ी सहकारी चीनी मिलों को पुनः शुरू किया जाए।

5. किसानों को गन्ने का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए।

6. पुरानी व कंडम हो चुकी शुगर मिलों की जगह नई व आधुनिक मिल लगाई जाए।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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