October 31, 2026 7:21 pm

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पंचकूला स्कूल में बच्ची से मारपीट का मामला: बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान, जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस

तीन दिन में मांगा जवाब, स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी भी होगी तय; आरोपी 8 वर्षीय छात्र का पीजीआई चंडीगढ़ में कराया जा रहा मानसिक एवं स्वास्थ्य परीक्षण

बाबूगिरी न्यूज़
पंचकूला। सेक्टर-20 स्थित संस्कृति स्कूल में केजी कक्षा की मासूम बच्ची के साथ तीसरी कक्षा के छात्र द्वारा बेरहमी से मारपीट किए जाने के मामले में अब हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। आयोग की इस कार्रवाई के बाद स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाएगी। आयोग यह पता लगाएगा कि स्कूल परिसर में इतनी गंभीर घटना किन परिस्थितियों में हुई और उस दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कहां थी।

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स्कूल प्रशासन की जवाबदेही होगी
आयोग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी से तीन दिनों में जवाब मांगे जाने के बाद स्कूल प्रशासन को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूल में बच्चों की निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मचारी और सुरक्षा प्रबंध मौजूद थे या नहीं। घटना के समय संबंधित शिक्षक और अन्य कर्मचारी कहां थे तथा बच्ची के साथ हुई मारपीट को रोकने के लिए समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया जा सका।
इसके अलावा स्कूल में बच्चों की सुरक्षा से संबंधित नियमों, निगरानी व्यवस्था और आपात स्थिति में कार्रवाई की प्रक्रिया की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।

पीजीआई में आरोपी छात्र का मानसिक एवं स्वास्थ्य परीक्षण
इस मामले में आरोपी छात्र की उम्र करीब आठ वर्ष बताई जा रही है। उसका पीजीआई चंडीगढ़ में मानसिक एवं स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। जांच का उद्देश्य बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति और घटना से जुड़े पहलुओं को समझना है।
आरोपी छात्र की कम उम्र के कारण इस मामले में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के कानूनी प्रावधान भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। आयोग का मानना है कि बच्चों से जुड़े ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ उनकी उम्र, परिस्थितियों और व्यवहार से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

जेजे एक्ट में संशोधन की सिफारिश करेगा आयोग
आठ वर्षीय छात्र की उम्र इस मामले में कानूनी कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई है। इसी संदर्भ में आयोग किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) में आवश्यक संशोधन की सिफारिश करने पर भी विचार कर रहा है।
आयोग का जोर इस बात पर है कि स्कूलों में बच्चों के बीच होने वाली गंभीर हिंसक घटनाओं से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था हो और ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों को न्याय तथा सुरक्षा मिल सके। हालांकि, किसी भी कानूनी कार्रवाई का निर्धारण लागू कानून और संबंधित तथ्यों के आधार पर ही होगा।

स्कूलों में अभिभावकों की काउंसलिंग व्यवस्था पर जोर
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों के व्यवहार, आपसी हिंसा और उनकी सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं। आयोग की ओर से स्कूलों में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की काउंसलिंग व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसका उद्देश्य बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को समय रहते समझना, उनमें आक्रामकता या हिंसक प्रवृत्ति के संकेतों को पहचानना और अभिभावकों तथा शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है।

बच्ची की सुरक्षा और स्कूलों की व्यवस्था पर उठे सवाल
पंचकूला के संस्कृति स्कूल में हुई इस घटना के बाद अभिभावकों और शिक्षा जगत में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। अब हरियाणा मानवाधिकार आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कार्रवाई के बीच मामले की जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
आने वाले दिनों में जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट और आयोग की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के लिए स्कूल स्तर पर कौन-कौन सी चूक जिम्मेदार रही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
अब निगाहें तीन दिन के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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