जींद: हरियाणा के जींद रेलवे जंक्शन के पास खड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल अभी कुछ और समय ले सकता है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि जनवरी के दूसरे सप्ताह तक इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा, लेकिन तकनीकी कारणों और सुरक्षा से जुड़े अहम पहलुओं के चलते इसमें देरी हो रही है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी और सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही ट्रेन को ट्रायल के लिए पटरी पर उतारा जाएगा।
हाइड्रोजन प्लांट में नमी बनी बड़ी चुनौती
रेलवे सूत्रों के मुताबिक हाइड्रोजन प्लांट में बनी नमी इस समय सबसे बड़ी तकनीकी समस्या है। हाइड्रोजन गैस अत्यंत ज्वलनशील और संवेदनशील होती है, ऐसे में गैस में मौजूद नमी इंजन, फ्यूल सेल और अन्य तकनीकी उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसी वजह से रेलवे विभाग पूरी सतर्कता के साथ इस समस्या का समाधान कर रहा है। नमी को पूरी तरह खत्म करने के लिए हाइड्रोजन प्लांट में विशेष हीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे गैस को पूरी तरह सूखा और सुरक्षित बनाया जा सके।
सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता नहीं
हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन को लेकर रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। ट्रेन से जुड़े हर सिस्टम—चाहे वह ईंधन भंडारण हो, गैस की सप्लाई हो या इंजन और फ्यूल सेल की कार्यप्रणाली—सबकी बारीकी से जांच की जा रही है। रेलवे अधिकारी मानते हैं कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक नई है, इसलिए किसी भी प्रकार का जोखिम लेना उचित नहीं होगा।
सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया अंतिम चरण में
हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल से पहले रेलवे को कई स्तरों पर सर्टिफिकेशन लेना होता है। इसके लिए संबंधित तकनीकी एजेंसियों और सुरक्षा विभागों से मंजूरी ली जा रही है। खास तौर पर हाइड्रोजन गैस के सुरक्षित भंडारण, उसके उपयोग और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सभी सर्टिफिकेशन पूरे होने के बाद ही ट्रायल की तारीख तय की जाएगी।
जनवरी के अंतिम सप्ताह में ट्रायल की संभावना
हालांकि रेलवे प्रबंधन इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर सतर्क है, फिर भी तकनीकी टीमों को उम्मीद है कि यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो गईं तो जनवरी के अंतिम सप्ताह तक जींद–सोनीपत रेलवे लाइन पर हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल किया जा सकता है। यह ट्रायल सीमित दूरी और नियंत्रित गति से किया जाएगा, ताकि सभी प्रणालियों की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जा सके।
ट्रैक से लेकर ट्रेन तक हर पहलू की जांच
हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल से पहले रेलवे ट्रैक की मजबूती, सिग्नल सिस्टम, ब्रेकिंग सिस्टम और कंट्रोल मैकेनिज्म की भी गहन जांच की जा रही है। इसके साथ ही ट्रेन की कार्यक्षमता, ईंधन आपूर्ति प्रणाली और सुरक्षा उपकरणों का अलग-अलग स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है।
रेलवे का बयान
उत्तर रेलवे के चीफ पीआरओ हिमांशु शेखर ने बताया कि इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम लगातार काम कर रही है। सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी जरूरी सर्टिफिकेशन और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू किया जाएगा।
पर्यावरण के लिए बड़ा कदम
हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यह ट्रेन डीजल या पारंपरिक ईंधन की तुलना में प्रदूषण रहित होगी और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी। सफल ट्रायल के बाद भविष्य में इस तकनीक का विस्तार अन्य रूटों पर भी किया जा सकता है, जिससे भारतीय रेलवे को हरित और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।











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