पंचकूला, 16 जनवरी 2025। पंचकूला में साइबर अपराधियों द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर आम लोगों को डराने–धमकाने का गंभीर मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को मुंबई साइबर सेल, क्राइम ब्रांच और सीबीआई से जुड़ा अधिकारी बताकर फर्जी समन, अरेस्ट वारंट और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को मानसिक दबाव में लिया और 7.31 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस ने पहली गिरफ्तारी करते हुए एक आरोपी को दबोच लिया है।
पंचकूला निवासी शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 18 दिसंबर को उसे एक फोन कॉल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई साइबर सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की आईडी से 21 फर्जी बैंक खाते खुले हुए हैं, जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स तस्करी में किया गया है। साथ ही 25 लाख रुपये के गबन का भी आरोप लगाया गया।
इसके बाद कॉल को एक अन्य कथित साइबर सेल अधिकारी को ट्रांसफर कर दिया गया, जिसने स्काइप के जरिए वीडियो कॉल पर शिकायतकर्ता को जोड़ा। ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई के नाम से फर्जी अरेस्ट वारंट भेजा और खातों की “जांच” के बहाने स्क्रीन शेयरिंग करवा ली। इसी दौरान पीड़ित से कुल 7 लाख 31 हजार रुपये की ठगी कर ली गई।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि शिकायत के आधार पर 26 दिसंबर को साइबर क्राइम थाना पंचकूला में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4) और 319(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच साइबर थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह के नेतृत्व में जांच अधिकारी अभिषेक छिल्लर द्वारा की गई।
जांच के दौरान 15 जनवरी को गांव हमीरपुर, जिला अलवर से संदिग्ध बिजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के बैंक खाते में 2 लाख 10 हजार रुपये की फ्रॉड राशि पाई गई है। आरोपी को माननीय अदालत में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि ठगी की रकम की बरामदगी, नेटवर्क की कड़ियों और सह-आरोपियों की पहचान की जा सके।
डीसीपी क्राइम ने बताया कि मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आई है और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हरियाणा सहित अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी की जा रही है।
डीसीपी मनप्रीत सिंह सूदन ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा,
“साइबर अपराधी फर्जी अधिकारी बनकर समन, अरेस्ट वारंट और वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर बैंक विवरण, ओटीपी या स्क्रीन शेयरिंग की मांग नहीं करती। ऐसे कॉल्स से सतर्क रहें और तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।”










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