October 12, 2026 2:53 pm

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बसंत पंचमी 2026: ज्ञान, विद्या और वसंत ऋतु का पर्व

सनातन धर्म में बसंत पंचमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा के मुख से विद्या, बुद्धि और विवेक की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण बसंत पंचमी को ज्ञान और विद्या के प्रतीक पर्व के रूप में मनाया जाता है और इस दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
बसंत पंचमी का संबंध कृषि और प्रकृति से भी जुड़ा है। इस समय खेतों में पकती फसलें पीले रंग में लहलहाती दिखाई देती हैं, जो वसंत ऋतु के आगमन का संकेत होती हैं। किसान वर्ग इस दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाता है।

बसंत पंचमी कब है
पंडित विश्वनाथ के अनुसार, बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 23 जनवरी को दोपहर 2:28 बजे आरंभ होगी और 24 जनवरी को दोपहर 1:40 बजे समाप्त होगी। चूंकि सभी व्रत और त्योहार उदय तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, इसलिए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।

पूजा का शुभ समय
बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा का शुभ समय सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। वहीं, विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए विशेष पूजा का समय सुबह 6:36 बजे से 10:40 बजे तक उत्तम माना गया है। इस समय पूजा करने से विद्या और कौशल में वृद्धि होती है।

बसंत पंचमी की पूजा विधि
पंडित विश्वनाथ के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई कर माँ सरस्वती की विधिवत पूजा करें या किसी निकटवर्ती मंदिर में दर्शन करें। पूजा के दौरान माँ सरस्वती को पीले फूल, फल, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाएं। विद्या, बुद्धि और शक्ति की प्राप्ति के लिए उनसे प्रार्थना करें।

विद्यार्थियों के लिए विशेष सुझाव
विद्यार्थियों को इस दिन माँ सरस्वती की विशेष आराधना करनी चाहिए। पूजा के समय अपने सामने कलम, कॉपी और अध्ययन से संबंधित सामग्री रखें। ऐसा करने से ज्ञान और विद्या में वृद्धि होती है। इस दिन वसंत ऋतु का आरंभ भी माना जाता है और कई स्थानों पर चावल की खीर बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है।
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देवाय सरस्वत्यै नमः।

माँ सरस्वती का आशीर्वाद
पंडित विश्वनाथ का कहना है कि बसंत पंचमी के अवसर पर दो दिनों तक माँ सरस्वती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इससे बुद्धि, ज्ञान और शिक्षा में उन्नति होती है। पढ़ाई में कमजोर बच्चों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। माँ सरस्वती की कृपा से शिक्षा, संगीत और लेखन के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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