April 6, 2026 12:15 am

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विधानमंडलों की जनता के प्रति सर्वोच्च जवाबदेही : विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में दिया संबोधन
चंडीगढ़/लखनऊ, 20 जनवरी: हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि विधानमंडल जनता की भावनाओं, आशाओं और आकांक्षाओं को उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही सर्वोपरि है। वे मंगलवार को 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में “जनता के प्रति विधानमंडलों की जवाबदेही” विषय पर संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में विस अध्यक्ष ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विधानमंडलों का मूल दायित्व जनता के हित में कार्य करना और उनके प्रति उत्तरदायी बने रहना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा सत्य यह है कि सत्ता का स्रोत जनता है और उसकी दिशा संविधान तय करता है। भारत का संविधान न केवल शासन की रूपरेखा प्रदान करता है, बल्कि विधानमंडलों को जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह बने रहने का स्पष्ट मार्गदर्शन भी करता है।
हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि विधानमंडलों की भूमिका केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण, विवादों का समाधान, विकास की दिशा तय करना, सामाजिक सुधार और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनके प्रमुख दायित्वों में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जवाबदेही को केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक जवाबदेही विधानमंडल के चरित्र, कार्य-संस्कृति और संस्थागत क्षमता का संयुक्त प्रतिबिंब होती है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल, समितियां और वित्तीय नियंत्रण जैसे संसदीय उपकरण तभी प्रभावी बनते हैं, जब उनके पीछे संवैधानिक दृष्टि, जनता के प्रति संवेदनशीलता और सशक्त संस्थागत ढांचा मौजूद हो।
हरियाणा विधान सभा द्वारा पिछले एक वर्ष में उठाए गए ठोस कदमों का उल्लेख करते हुए विस अध्यक्ष ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष के मार्गदर्शन में विधानमंडल को अधिक जवाबदेह, सक्षम और सहभागी बनाने के लिए अनेक पहल की गई हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण योजना लागू की गई, लोकसभा के सहयोग से विधायी ड्राफ्टिंग पर कार्यशालाओं का आयोजन हुआ तथा विधायकों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में पटना में आयोजित 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के प्रस्तावों को अमल में लाने के लिए भी कई पहल की गईं। लोकसभा के सहयोग से गुरुग्राम में राष्ट्रीय शहरी स्थानीय निकायों की कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें देशभर के महापौरों और अध्यक्षों ने भाग लिया। इसके अलावा हरियाणा विधान सभा में लेजिस्लेटिव रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर का गठन किया गया।
युवाओं को विधायी प्रक्रिया से जोड़ने के लिए तीन युवा संसद कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं विधान सभा की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए भी विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इसके साथ ही युवा मामलों और पर्यावरण से संबंधित दो नई समितियों का गठन भी किया गया।
विस अध्यक्ष ने कहा कि इन सभी प्रयासों के माध्यम से हरियाणा विधानसभा ‘एक राष्ट्र, एक विधायिका’ की भावना के अनुरूप पारदर्शी और सहभागी विधायी प्रणाली के निर्माण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सशक्त विधायिका, जागरूक समाज और मजबूत संस्थागत क्षमता के बिना विकसित भारत–2047 का संकल्प पूरा नहीं हो सकता।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शब्दों को उद्धृत करते हुए हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि सदन की नैतिक शक्ति और जनमत की स्वीकृति ही प्रशासन की शुचिता और लोकतंत्र की मजबूती का सबसे बड़ा आधार है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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