सेवा गुणवत्ता, जवाबदेही और संस्थागत प्रदर्शन सुधार पर आयोग का जोर
चंडीगढ़, 23 जनवरी: हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने राज्य की पावर यूटिलिटीज के लिए बड़े सुधारात्मक कदम उठाते हुए तीन अहम व्यवस्थाओं को अनिवार्य कर दिया है। आयोग ने सेवा वितरण में सुधार, जवाबदेही तय करने और विद्युत क्षेत्र में संस्थागत प्रदर्शन को मजबूत करने के उद्देश्य से उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक (कंज़्यूमर सैटिस्फैक्शन इंडेक्स–सीएसआई), बैलेंस्ड स्कोरकार्ड प्रणाली और आईएसओ प्रमाणन लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
एचईआरसी के अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा ने राज्य सलाहकार समिति (एसएसी) की 33वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि अब एसएसी की बैठक वर्ष में तीन बार आयोजित की जाएगी और इनमें लिए गए सभी निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना पावर यूटिलिटीज की जिम्मेदारी होगी।

तीन माह में लागू होगा उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक
आयोग ने निर्देश दिए कि सभी पावर यूटिलिटीज तीन माह के भीतर सुव्यवस्थित सीएसआई प्रणाली लागू करें, जिसकी मासिक निगरानी की जाएगी। सीएसआई का मूल्यांकन सेक्शन स्तर पर जूनियर इंजीनियर से लेकर उप-मंडल, मंडल और यूटिलिटी स्तर तक किया जाएगा, ताकि उपभोक्ता सेवाओं में वास्तविक सुधार हो और जवाबदेही तय की जा सके।
चार माह में बैलेंस्ड स्कोरकार्ड प्रणाली
लक्ष्य आधारित प्रदर्शन और प्रणालीगत सुधार को संस्थागत रूप देने के लिए चार माह के भीतर बैलेंस्ड स्कोरकार्ड प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों प्रकार के लक्ष्यों की निगरानी की जाएगी। इसमें उपभोक्ता संतुष्टि, संचालन दक्षता, सुरक्षा, हानियों में कमी, सेवा गुणवत्ता और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख संकेतक शामिल होंगे। इसकी मासिक समीक्षा फील्ड स्तर से लेकर शीर्ष प्रबंधन स्तर तक अनिवार्य होगी।

आईएसओ प्रमाणन पर जोर
आयोग ने बताया कि वर्तमान में हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) ही राज्य की एकमात्र आईएसओ प्रमाणित यूटिलिटी है। एचईआरसी ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन), उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) को भी आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, एकरूपता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां सुनिश्चित की जा सकें।
लागत अनुकूलन और बिजली खरीद पर निर्देश
लागत नियंत्रण पर जोर देते हुए अध्यक्ष ने हरियाणा पावर परचेज सेंटर (एचपीपीसी) की कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई, ताकि अल्पकालिक और मध्यम अवधि की बिजली खरीद में वित्तीय नुकसान से बचा जा सके। उपभोक्ताओं पर अनावश्यक भार कम करने के लिए उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी गई।
एटी एंड सी हानियों में कमी के प्रयास
बैठक में डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि एग्रीगेट टेक्निकल एवं कमर्शियल (एटी एंड सी) हानियों को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ₹51,156.71 करोड़ की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) का अनुमान आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया है।

बिलिंग विवाद और सुरक्षा पर सख्ती
आयोग ने बिजली क्षेत्र में बढ़ते विवादों, विशेषकर बिलिंग से जुड़े मामलों पर चिंता जताई और यूटिलिटीज को प्रणालीगत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही घातक विद्युत दुर्घटनाओं का विवरण मांगा गया और झूलती ओवरहेड लाइनों, ट्रांसफार्मरों के पास असुरक्षित हालात तथा खुले तारों जैसी समस्याओं को तुरंत दूर करने को कहा गया।
रूफटॉप सोलर की निगरानी सख्त
रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन को लेकर आयोग ने कहा कि कमीशनिंग के बाद निगरानी व्यवस्था कमजोर है। यूटिलिटीज को निर्देश दिए गए कि वे वेंडरों के कार्यों में से 10 से 25 प्रतिशत का यादृच्छिक गुणवत्ता निरीक्षण करें, वेंडर प्रदर्शन रेटिंग सार्वजनिक करें और सोलर से जुड़ी शिकायतों को सामान्य शिकायत निवारण प्रणाली में शामिल करें। इस दौरान चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डॉ. बी. आर. कंबोज ने अधिक लचीली सोलर नीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
समय पर क्रियान्वयन पर दोहराया जोर
बैठक के समापन पर अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा ने दोहराया कि एसएसी के निर्णयों का समय पर क्रियान्वयन अनिवार्य है और उपभोक्ताओं से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान तथा सेवा गुणवत्ता में सुधार हरियाणा की पावर यूटिलिटीज की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में एचईआरसी के सदस्य मुकेश गर्ग और शिव कुमार, एचईआरसी के सचिव प्रशांत देष्टा, विद्युत लोकपाल आर. के. खन्ना सहित एचपीजीसीएल, एचवीपीएन, यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन के वरिष्ठ अधिकारी एवं एसएसी सदस्य उपस्थित रहे।












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