April 6, 2026 1:06 am

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PANCHKULA: बुजुर्ग महिला से 2.98 करोड़ की साइबर ठगी में 2 और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 3 काबू

नकली CBI, फर्जी कोर्ट रूम और “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए दिया गया था ठगी को अंजाम

रमेश गोयत

पंचकूला, 25 जनवरी 2026: पंचकूला पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने बुजुर्ग महिला से 2 करोड़ 98 लाख रुपये की साइबर ठगी के सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस मामले में एक आरोपी को पहले ही काबू किया जा चुका है। अब तक कुल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अजय और राम के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के निवासी हैं और फिलहाल मोहाली में किराये के मकान में रह रहे थे। पुलिस ने दोनों को 24 जनवरी को गिरफ्तार कर 25 जनवरी को अदालत में पेश किया, जहां से चार दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है।

जन-धन योजना का लालच देकर 7 लाख रुपये खाते में डलवाए
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने चंडीगढ़ निवासी एक महिला को प्रधानमंत्री जन-धन योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर उसके बैंक से संबंधित दस्तावेज हासिल किए। इसके बाद साइबर ठगी की गई 2.98 करोड़ रुपये की राशि में से 7 लाख रुपये महिला के खाते में डलवाए गए।
जब खाते की जांच के दौरान पुलिस महिला के घर पहुंची, तो महिला ने पूरी आपबीती बताई और आरोपियों की जानकारी साझा की, जिसके आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया।

पहले भी हो चुकी है एक गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस पहले ही 15 जनवरी को पूर्वी दिल्ली निवासी नितिन सिंघल को दिल्ली में दबिश देकर गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में आरोपी के बैंक खाते में करीब 17 लाख रुपये की ठगी की रकम पाई गई थी। रिमांड के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों में घुमाया गया, ताकि ट्रेल छिपाई जा सके।

क्या था पूरा मामला
पीड़िता पंचकूला निवासी बुजुर्ग महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 4 दिसंबर को उसके पास एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताते हुए सेवाएं बंद होने की बात कही। इसके बाद कॉल को कथित सीनियर अधिकारी और फिर खुद को CBI अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से जोड़ दिया गया।
आरोपियों ने महिला पर बैंकिंग चैनलों के माध्यम से करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया। भरोसा जीतने के लिए कुछ फोटो भेजीं, जिनमें एक व्यक्ति को गिरफ्त में दिखाया गया था।
आरोपियों ने महिला की अधिक उम्र का फायदा उठाते हुए उसे “हाउस अरेस्ट” में होने का डर दिखाया और कहा कि पुलिस की गाड़ी उसके घर के बाहर खड़ी है। साथ ही धमकी दी गई कि अगर किसी को बताया तो उसके बच्चों की जान को खतरा होगा। इस दौरान महिला से सभी बैंक खातों की जानकारी ले ली गई।
5 दिसंबर को आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए महिला को एक नकली कोर्ट रूम में पेश किया, जहां फर्जी पुलिसकर्मी और नकली जज मौजूद थे। तथाकथित जांच के नाम पर डराकर महिला से 2.98 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में जब और पैसों की मांग की गई, तब महिला को ठगी का शक हुआ और उसने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई।

इन धाराओं में मामला दर्ज
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाना पंचकूला में 14 दिसंबर को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(2), 318(4), 319(2), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी समन, वारंट, नकली कोर्ट रूम और जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर इस सुनियोजित ठगी को अंजाम दिया।

पुलिस की अपील
डीसीपी ने आमजन से अपील की कि
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती
डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है
सरकारी योजना के नाम पर बैंक दस्तावेज, ओटीपी या निजी जानकारी मांगने वालों से सतर्क रहें
किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।

 

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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