रोहतक। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एसवाईएल नहर विवाद को लेकर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की प्रस्तावित बैठक पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ बातचीत का अब कोई औचित्य नहीं बचा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट हरियाणा के पक्ष में कई साल पहले ही फैसला दे चुका है। ऐसे में हरियाणा सरकार को बातचीत के बजाय पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करनी चाहिए।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बैठकों का दिखावा कर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि इससे पहले भी कई दौर की बातचीत बेनतीजा साबित हो चुकी है।
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को पीएम से नहीं मिला समय
सोमवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए हुड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट फैसले के बावजूद भाजपा सरकार आज तक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय तक नहीं दिला पाई। उन्होंने कहा कि जब फैसला हरियाणा के पक्ष में है तो फिर पंजाब के साथ बातचीत करने का कोई मतलब नहीं बनता।
कई बार हो चुकी हैं बैठकें, नतीजा शून्य
एसवाईएल नहर विवाद के समाधान को लेकर 27 जनवरी को चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच एक बार फिर बैठक प्रस्तावित है। इससे पहले 9 जुलाई और 5 अगस्त 2024 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।
इसके अलावा 28 दिसंबर 2023, 4 जनवरी 2023, 14 अक्टूबर 2022 और 18 अगस्त 2020 को भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर आमने-सामने बैठ चुके हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर एक बार फिर बैठक बुलाई गई है।
क्या है SYL नहर विवाद
एसवाईएल नहर विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच रावी-ब्यास नदियों के जल बंटवारे से जुड़ा दशकों पुराना अंतरराज्यीय विवाद है।
वर्ष 1981 के समझौते के अनुसार 214 किलोमीटर लंबी नहर में से 122 किलोमीटर पंजाब और 92 किलोमीटर हरियाणा में बननी थी। हरियाणा ने अपने हिस्से की नहर बना दी, लेकिन पंजाब ने निर्माण अधूरा छोड़ते हुए जमीन डिनोटिफाई कर दी और करीब 42 किलोमीटर हिस्सा समतल कर दिया।
हरियाणा ने वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 2016 में शीर्ष अदालत ने हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाया। बावजूद इसके पंजाब सरकार इस फैसले को मानने को तैयार नहीं है, जिससे हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है।
बजट सुझाव भेजने से कांग्रेस का इंकार
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार द्वारा बजट को लेकर मांगे गए सुझाव भेजने से भी इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले भी कई बार जनहित से जुड़े सुझाव देता रहा है, लेकिन सरकार ने कभी उन पर अमल नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर बार सुझाव मांगकर जनता की आंखों में धूल झोंकती है। कांग्रेस अब सुझाव भेजने के बजाय विधानसभा सत्र में सरकार से सीधे सवाल पूछेगी।
कर्ज, घोटाले और राशन कार्ड का मुद्दा उठाया
हुड्डा ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास कार्य न होने के बावजूद राज्य पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सरकार पर घोटालों में शामिल होने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव के समय राजनीतिक लाभ के लिए लाखों राशन कार्ड बनवाए गए और चुनाव के बाद अब उन्हें काटा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के करीब 50 प्रतिशत पद खाली होने का मुद्दा भी उठाया।
‘हरियाणा में किसकी सरकार है, यही स्पष्ट नहीं’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में किसकी सरकार चल रही है, यह तक स्पष्ट नहीं है। विधानसभा में भी यही स्थिति दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री की बजाय दिल्ली में बैठे नेताओं की सुनते हैं।
एक सवाल के जवाब में हुड्डा ने कहा कि इनेलो भाजपा की बी-टीम है, यह बात अब भाजपा के नेता भी स्वीकार कर रहे हैं।
संविधान से छेड़छाड़ नहीं होने देंगे: हुड्डा
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि संविधान प्रजातंत्र की आत्मा है और कांग्रेस संविधान के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा न्यायपालिका को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन कांग्रेस संविधान को मजबूत करने के लिए संघर्ष करती रहेगी।











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