चंडीगढ़/पंचकूला। पंचकूला में अवैध माइनिंग का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठेकेदारों पर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की कीमती जमीन से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकालकर बेचने का गंभीर आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के कुछ अधिकारियों, ठेकेदारों और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के इंजीनियरों की मिलीभगत से चल रहा है।
आरोप है कि सीएचबी की जमीन को करीब 20 फुट तक खोद दिया गया, और वहां से निकाली गई मिट्टी को खुले बाजार में बेचकर अरबों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले को जानबूझकर दबाया गया और संबंधित विभागों ने आंखें मूंदे रखीं।
इंजीनियरों पर मामला दबाने के आरोप
सूत्र बताते हैं कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के इंजीनियरों को इस अवैध खुदाई की पूरी जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप यह भी है कि शिकायतें सामने आने के बाद भी फाइलों को दबाकर रखा गया और मौके पर किसी प्रकार की सख्त जांच नहीं की गई।

क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक पंचकूला के एमडीसी डॉलफिन चौक से लेकर एमडीसी सेक्टर-2 और सेक्टर-7 होते हुए सुखना लेक तक एक डिवाइडिंग रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। इस परियोजना के लिए एचएसवीपी द्वारा करीब 6 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर ठेकेदारों ने उसी स्थान से अवैध माइनिंग शुरू कर दी, जहां से मिट्टी निकालकर सड़क में डाल दी। जबकि टेंडर के नियमानुसार मिट्टी बाहर से लाकर डालनी थी। जिसको अधिकारियों द्वारा मिट्टी के सोर्स को प्रमाणित किया जाना था, की मिट्टी कहा से खरीदकर डाली गई है। हकीकत में बड़ी मात्रा में मिट्टी बाहर भी बेच दी गई, जिससे सरकारी जमीन को भारी नुकसान पहुंचा।
एचएसवीपी की जमीन से भी अवैध उठान
मामले में यह भी सामने आया है कि सिर्फ सीएचबी ही नहीं, बल्कि एचएसवीपी की जमीन से भी करोड़ों रुपये की मिट्टी अवैध रूप से उठाई जा रही है। इससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
विजिलेंस जांच की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं और अवैध माइनिंग के इस नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।











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