April 6, 2026 10:39 am

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सांसद जय प्रकाश ‘जेपी’, सांसद दीपेन्द्र हुड्डा, सांसद वरुण चौधरी एवं सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने हरियाणा को राष्ट्रमंडल खेल 2030 का मेजबान या सह-मेजबान बनाने की मांग दोहराई

 राष्ट्रमंडल खेल 2030  की मेज़बानी अथवा सह मेज़बानी के लिए हरियाणा सरकार तुरंत प्रस्ताव करे और भारत सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे
·       लोकसभा में सांसद सांसद वरुण चौधरी के सवाल के जवाब से खुलासा हुआ कि हरियाणा की बीजेपी सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम 2030 के लिए कोई प्रस्ताव तक नहीं भेजा
·       हरियाणा की बीजेपी सरकार प्रदेश के हितों की बात रखने में बार-बार विफल साबित हो रही – वरुण चौधरी
·       हरियाणा में खेल ढाँचे की दुर्दशा के चलते हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही– दीपेन्द्र हुड्डा
·       बीजेपी सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय बने खेल स्टेडियमों का रिपेयर तक नहीं कराया, खेल नर्सरियों की दुर्दशा कर डाली, ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति और SPAT नीति को खत्म कर दिया – जय प्रकाश ‘जेपी’
·       कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले हरियाणा की उपेक्षा करना घोर अन्याय – सतपाल ब्रह्मचारी

चंडीगढ़, 10 फरवरी। लोकसभा में सांसद सांसद वरुण चौधरी के सवाल के जवाब से खुलासा हुआ कि हरियाणा की बीजेपी सरकार ने वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान या सह मेजबान के रूप में हरियाणा को शामिल करने का कोई प्रस्ताव तक नहीं भेजा। सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि हरियाणा की बीजेपी सरकार प्रदेश के हितों की बात रखने में बार-बार विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पानी, पूरी राजधानी, अलग उच्च न्यायालय, विधानसभा भवन के लिये स्थान, ग्रुप ए और बी में हरियाणा के युवाओं को रोजगार, कुछ भी नहीं मिल रहा है और अब पूरे विश्व में भारत माता का नाम रौशन करने वाले हरियाणा के खिलाड़ियों को ध्यान में रखते हुए 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी या सह मेजबानी, जो हरियाणा प्रदेश में होनी चाहिये थी वह भी, हरियाणा में नहीं हो रही। हरियाणा सरकार ने भारत सरकार को इसके लिये प्रस्ताव तक भेजना उचित नहीं समझा और भारत सरकार ने भी हरियाणा को नजरअंदाज़ किया है। चारों सांसद – सांसद जय प्रकाश ‘जेपी’, सांसद दीपेन्द्र हुड्डा, सांसद वरुण चौधरी एवं सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने राष्ट्रमंडल खेल 2030 के मेजबान या सह-मेजबान के रूप में हरियाणा को शामिल करने की मांग दोहराई और कहा कि राष्ट्रमंडल खेल 2030  की मेज़बानी अथवा सह मेज़बानी के लिए हरियाणा सरकार तुरंत प्रस्ताव करे और भारत सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे। हरियाणा को उसका हक मिलना ही चाहिए। इससे पहले भी चारों सांसदों ने संसद परिसर में ‘ओलंपिक व कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में हो’ के नारे लिखी तख्तियाँ लेकर संसद परिसर में नारा लगाकर प्रदर्शन किया था।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिस हरियाणा प्रदेश के खिलाड़ी देश को 50% से अधिक मेडल दिलाते हों, क्या वह कॉमनवेल्थ खेल 2030 की मेजबानी का हकदार नहीं? इससे भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि हरियाणा सरकार ने इसकी मेजबानी या सह-मेजबानी के लिए कोई प्रस्ताव भी नहीं भेजा। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि आज हरियाणा में खेल ढाँचे की इतनी दुर्दशा है कि खेल के मैदान में प्रैक्टिस करते हुए हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही है। कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 में हरियाणा को कम से कम को-होस्ट राज्य बनाने से लाखों करोड़ के बजट में से हरियाणा के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी कुछ खर्च हो पाएगा।

सांसद जय प्रकाश जेपी ने कहा कि देश की कुल आबादी के 2% आबादी वाले हरियाणा की ओलंपिक खिलाड़ियों के दल में 21% हिस्सेदारी है और देश को मिलने वाले मेडल में लगभग 50% भागीदारी है। फिर भी सरकार हरियाणा के लिए खेलो इंडिया में न के बराबर बजट दे रही है। यह देश की खेल भावना के साथ क्रूर मजाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिये ग्रामीण अंचलों में खेल स्टेडियम बनाये थे, खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति और स्कूल स्तर पर कक्षा पहली से खेल-खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए SPAT नीति को भी बीजेपी सरकार ने खत्म कर दिया। SPAT नीति के तहत SC समाज की बेटियों को जिले/राज्य स्तर तक पहुंचने पर 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, इसे भी भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया। बीजेपी सरकार हरियाणा में कांग्रेस सरकार के समय बने 481 खेल स्टेडियमों के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट तक नहीं दे पाई। 11 साल में नया स्टेडियम बनाना तो दूर, मौजूदा स्टेडियमों का रिपेयर तक नहीं कराया, खेल नर्सरियों की दुर्दशा कर डाली। जिसके चलते हाल ही में 2 होनहार खिलाड़ियों को जान तक गँवानी पड़ी।

सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि हरियाणा को खेलो इंडिया बजट में सबसे कम बजट दिया गया। देश के ₹3500 करोड़ के ‘खेलो इंडिया’ बजट में ₹600 करोड़ गुजरात को और सबसे ज्यादा मेडल लाने वाले हरियाणा को सिर्फ ₹80 करोड़ ही दिए गए, जो देश में सबसे कम है। जबकि, ओलंपिक, एशियाई, कॉमनवेल्थ खेल हों, सबसे ज्यादा मेडल हरियाणा के खिलाड़ी लाते हैं फिर भी उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया। जब भारत को कॉमनवेल्थ खेल 2030 की मेज़बानी का मौका मिला, तो इसके लिए गुजरात को चुना गया क्योंकि हरियाणा की बीजेपी सरकार प्रदेश के हक की आवाज तक नहीं उठा सकी। इसी प्रकार सरकार ने ओलंपिक 2036 को भी गुजरात में कराने के लिए आधिकारिक बोली (बिडिंग) पेश करने की घोषणा की है। वहाँ भी हरियाणा की आवाज नहीं रखी गई।

ज्ञात हो कि सांसद वरुण चौधरी ने पूछा कि क्या हरियाणा सरकार ने वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान या सह मेजबान के रूप में हरियाणा को शामिल करने का अनुरोध किया है? जिसके जवाब में केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने स्पष्ट रूप से कहा कि “नहीं, विभाग के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।”

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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