चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बुढ़ापा पेंशन की पात्रता तय करने में बच्चों की आय को मापदंड बनाने के राज्य सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस निर्णय को संवेदनहीन, जनविरोधी और बुजुर्ग-विरोधी करार देते हुए कहा कि यह नीति सीधे तौर पर बुजुर्गों के सम्मान और स्वाभिमान पर चोट करती है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि बुढ़ापा पेंशन कोई सरकारी मेहरबानी नहीं, बल्कि बुजुर्गों का संवैधानिक और नैतिक अधिकार है। इस योजना का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन देना है, लेकिन सरकार अब बच्चों की आय के आधार पर माता-पिता की पेंशन रोकने या काटने की कोशिश कर रही है, जो अमानवीय होने के साथ-साथ सामाजिक न्याय और पारिवारिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में 3–4 लाख रुपये की वार्षिक आय को संपन्नता मानना पूरी तरह हास्यास्पद है। बढ़ती महंगाई, इलाज के बढ़ते खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच ऐसी आय वाले परिवारों को भी पेंशन से वंचित करना सरकार की जनविरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर कठोर, अव्यावहारिक और मनमाने मापदंड लागू कर रही है, ताकि बड़ी संख्या में बुजुर्गों को इस अधिकार से वंचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह नीति बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उन्हें बच्चों पर निर्भर बनाती है, जबकि हकीकत यह है कि कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं, उनके बच्चे दूर रहते हैं या उन्हें पारिवारिक सहयोग नहीं मिल पाता।
राव नरेंद्र सिंह ने हरियाणा सरकार से मांग की कि यह जनविरोधी शर्त तुरंत वापस ली जाए और सभी पात्र बुजुर्गों को बिना किसी भेदभाव के बुढ़ापा पेंशन दी जाए, ताकि उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा हो सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो हरियाणा कांग्रेस बुजुर्गों के सम्मान, गरिमा और उनके हक की रक्षा के लिए सड़कों से लेकर विधानसभा तक हर स्तर पर आंदोलन करेगी। पार्टी बुजुर्गों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी।











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