April 6, 2026 5:01 am

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चंडीगढ़ में विदेश भेजने के नाम पर ठगी का गोरखधंधा बेखौफ, प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम उड़ रहीं धज्जियां

चंडीगढ़। शहर में विदेश भेजने के नाम पर चल रही ठगी थमने का नाम नहीं ले रही है। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा समय-समय पर इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स पर सख्ती और नियमों के बावजूद सेक्टर-17 स्थित कई फर्जी और संदिग्ध इमिग्रेशन कंपनियां बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को लाखों रुपये का चूना लगा रही हैं। ताजा मामलों में एक के बाद एक कई एफआईआर दर्ज हुई हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि यह ठगी संगठित गिरोह के रूप में चल रही है।

रोहतक रोड निवासी दिनेश मलिक की शिकायत पर पुलिस स्टेशन सेक्टर-17 में एफआईआर संख्या 23 दर्ज की गई है। इसमें आईपीसी की धारा 420, 120-बी और आव्रजन अधिनियम की धारा 24 के तहत व्हाइट हॉर्स इमिग्रेशन, एससीओ नंबर 60-61, दूसरी मंजिल, सेक्टर-17/डी, चंडीगढ़ के अनुभव गर्ग उर्फ अंशु और अन्य को आरोपी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने विदेश में वर्क वीजा दिलाने का झांसा देकर दिनेश मलिक से कुल 9,10,000 रुपये की राशि ऐंठ ली, लेकिन न तो वीजा दिलाया गया और न ही पैसे लौटाए गए।

इसी कंपनी के खिलाफ दूसरा मामला प्रताप सिंह, निवासी बहादुर फकीरन, जिला पटियाला (पंजाब) की शिकायत पर दर्ज किया गया है। पुलिस स्टेशन सेक्टर-17 में एफआईआर संख्या 24 के तहत दर्ज इस मामले में भी आरोप है कि अनुभव गर्ग उर्फ अंशु और उसके साथियों ने विदेश में वर्क वीजा दिलाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 15,90,000 रुपये की धोखाधड़ी की। दोनों मामलों में पुलिस को शक है कि पीड़ितों को फर्जी दस्तावेज, झूठे ऑफर लेटर और मनगढ़ंत वादों के जरिए लंबे समय तक गुमराह किया गया।

ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। पंचकुला निवासी अमनदीप कौर की शिकायत पर एफआईआर संख्या 25 दर्ज की गई है। इस मामले में मेसर्स न्यू पाथ ओवरसीज, एससीओ नंबर 64-65, चौथी मंजिल, सेक्टर-17/ए, चंडीगढ़ के मालिक/निदेशक नरिंदर सिंह और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) और आव्रजन अधिनियम की धारा 24 के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि अमनदीप कौर को विदेश में वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 3,39,550 रुपये की धोखाधड़ी की गई।

एक अन्य मामले में सेक्टर-41/डी, चंडीगढ़ निवासी एक महिला की शिकायत पर रेहल कंसल्टेंट्स के मालिकों मोनिका रेहल, परमजीत सिंह और अन्य के खिलाफ एफआईआर संख्या 26 दर्ज की गई है। सेक्टर-17/डी स्थित इस फर्म पर आरोप है कि शिकायतकर्ता को विदेश में स्टडी वीजा दिलाने का झांसा देकर उससे 6,00,000 रुपये की रकम ले ली गई। इस मामले में भी बीएनएस की धारा 318(4), 61(2) और आव्रजन अधिनियम की धारा 24 के तहत कार्रवाई की गई है।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-17 जैसे वीआईपी और व्यावसायिक क्षेत्र में खुलेआम इमिग्रेशन ठगी का कारोबार होना यह दर्शाता है कि नियमों और लाइसेंस प्रणाली की सख्ती कागजों तक ही सीमित है।
पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के बैंक खातों, दस्तावेजों, लाइसेंस और विदेशी संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन इमिग्रेशन कंपनियों के पास वैध लाइसेंस थे या नहीं और क्या इनमें और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।

चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि विदेश जाने के लिए किसी भी इमिग्रेशन कंसल्टेंट को पैसे देने से पहले उसके लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और रिकॉर्ड की पूरी जांच करें। साथ ही, किसी भी तरह के झांसे या ठगी की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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Author: BabuGiri Hindi

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