चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा सदन में पेश किए गए ₹1,712 करोड़ के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हरियाणा एडवोकेट जनरल कार्यालय के पूर्व अधीक्षक व प्रमुख समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने इसे “जनता को गुमराह करने वाला दस्तावेज” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल इंडिया, AI और 2047 के सपनों की आड़ में प्रशासन आम नागरिकों पर ₹461 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली का बोझ डालने की तैयारी कर रहा है।
राजबीर सिंह भारतीय ने बजट के गहन विश्लेषण के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर 8 गंभीर सवाल उठाए:
1. डिजिटल ड्रीम या टैक्स का जाल?
AI और डिजिटल सिस्टम पर ₹12 करोड़ का खर्च जनसुविधा नहीं, बल्कि “स्मार्ट तरीके से टैक्स” वसूलने की योजना है। जब शहर की सड़कें बदहाल हैं, तो सॉफ्टवेयर पर करोड़ों खर्च करना अव्यावहारिक है।
2. ‘स्मार्ट सिटी’ के नाम पर ‘महंगी सिटी’
₹461 करोड़ का राजस्व लक्ष्य सीधे जनता की जेब से निकलेगा। पानी के बिल, ‘वन पास’ पार्किंग और कचरा कलेक्शन शुल्क बढ़ाने से मध्यम वर्ग पर सीधा प्रहार होगा।
3. बुनियादी ढांचे में 24% की भारी कटौती
केंद्र से मिलने वाले पूंजीगत व्यय (Capital Outlay) में लगभग 24% की गिरावट से नई सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के नवीनीकरण पर ब्रेक लग जाएगा।
4. स्वास्थ्य बजट में कटौती दुर्भाग्यपूर्ण
कुल बजट में ₹438 करोड़ की कमी और स्वास्थ्य क्षेत्र में 3% की कटौती बढ़ती आबादी के बीच लोगों को निजी अस्पतालों पर निर्भर करेगी।
5. 60% से अधिक पद खाली, सेवाएं वेंटिलेटर पर
निगम में 60–67% नियमित पद रिक्त हैं। बिना मैनपावर के पार्क, सड़कें और सीवरेज कैसे सुधरेंगे? आउटसोर्सिंग गुणवत्ता गिराने वाला अस्थायी समाधान है।
6. पानी और पार्किंग पर दोहरी मार
24×7 पानी का वादा अधूरा, लेकिन वाटर चार्ज और स्मार्ट पार्किंग को राजस्व का मुख्य स्रोत बनाया जा रहा है। मासिक पार्किंग पास से मिडिल क्लास सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।
7. निगरानी तंत्र का अभाव
यदि स्टाफ नहीं, तो ₹140 करोड़ के सड़क मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा? निगम आउटसोर्सिंग का अड्डा बनता जा रहा है।
8. डंपिंग ग्राउंड और जमीनी मुद्दे जस के तस
दादू माजरा डंपिंग ग्राउंड और पानी की किल्लत जैसे बुनियादी मुद्दों पर बजट कम होना प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
सीधी चेतावनी:
“चंडीगढ़ ‘सिटी ब्यूटीफुल’ तभी है जब इसके नागरिक खुशहाल हों। यदि टैक्स बढ़ोतरी के प्रस्ताव वापस नहीं लिए गए, तो समाजसेवी संस्थाएं सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगी। बजट कागजों पर आत्मनिर्भर दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जन-जीवन सरल बनाने के लिए होना चाहिए।” — राजबीर सिंह भारतीय
प्रमुख मांगें:
‘यूजर चार्जेस’ बढ़ाने के बजाय फिजूलखर्ची पर रोक।
केंद्र सरकार से चंडीगढ़ के हक का पूरा फंड सुनिश्चित किया जाए।
डिजिटल खिड़कियों से पहले गड्ढा मुक्त सड़कें और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएं।













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