September 21, 2026 9:40 am

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आलू खरीद का मसला; न तखड़ी,  न बट्टा, 100 रुपये में आलू का कट्टा

भारी घाटे से जूझ रहे आलू उत्पादक किसान

किसान नेता रतनमान ने सरकार से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

चंडीगढ़ 20 फरवरी। प्रदेश में आलू उत्पादक किसान इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उत्पादन लागत लगातार बढऩे और बाजार में बेहद कम दाम मिलने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि किसान अपनी लागत तक निकाल पाने में असमर्थ हैं और कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार किसानों को आलू उत्पादन पर प्रति क्विंटल लगभग 1450 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। जबकि मंडियों में उन्हें अपनी उपज के मात्र 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक ही भाव मिल रहे हैं। लागत और बिक्री मूल्य के बीच इस भारी अंतर ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने आलू किसानों की लगातार बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज किसान किसी एक पक्ष से नहीं बल्कि पूरे अव्यवस्थित कृषि तंत्र से पीडि़त है। उन्होंने कहा कि आलू किसानों को न तो फसल का वाजिब दाम मिल रहा है और न ही सरकार या बाजार से कोई ठोस सुरक्षा। रतनमान ने कहा कि किसानों ने भरोसे के साथ आलू की खेती की और भारी लागत लगाई लेकिन फसल तैयार होने के बाद किसान खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है। बाजार में भाव गिर चुके हैं। खरीद की कोई गारंटी नहीं है और जब किसान अपनी उपज लेकर खड़ा होता है तो उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब किसान संकट में है तब न तो सरकारी एजेंसियां आगे आ रही हैं और न मंडी व्यवस्था किसानों को राहत दे पा रही है और न ही खरीद से जुड़े समझौतों को गंभीरता से लागू कराया जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा आलू किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जो कर्ज और नुकसान के दलदल में धकेले जा रहे हैं।

कॉन्ट्रैक्ट कंपनियों ने भी छोड़ा आलू किसानों का साथ

रतनमान ने निजी कॉन्ट्रैक्ट कंपनियों के रवैये पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसानों के साथ आलू और बीज खरीद के पक्के समझौते करने वाली कंपनियां अब गिरते बाजार भाव  को देखते हुए रिजेक्शन का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से भाग रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कॉन्ट्रैक्ट के नाम पर किसानों को उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया। लेकिन अब फसल तैयार होने के बाद रिजेक्शन का बहाना बनाकर खरीद से पीछे हटना सीधे तौर पर किसानों के साथ धोखा है। रतनमान ने कहा कि इस मनमाने रवैये के कारण किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। एक तरफ लागत बढ़ चुकी है और दूसरी तरफ बाजार में भाव गिर चुके हैं। ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट कंपनियों का पीछे हटना किसानों को पूरी तरह असहाय बना रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो संगठन प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर ठोस और किसान हितैषी निर्णय लेने चाहिए। अन्यथा आलू खेती का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

समाधान : भावांतर भरपाई योजना में हो संशोधन, विशेष अनुदान की मांग

किसान संगठन ने सरकार से मांग की है कि भावांतर भरपाई योजना के तहत आलू का निर्धारित मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर कम से कम 950 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए, ताकि किसानों को वास्तविक लागत के अनुसार राहत मिल सके। साथ ही योजना की राशि बिना देरी सीधे किसानों के खातों में जमा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। भारतीय किसान यूनियन ने आलू की खेती को बचाने और किसानों को राहत देने के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये का विशेष अनुदान देने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत, महंगे बीज और कृषि संसाधनों के कारण किसान खेती जारी रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

 

आलू की खेती में लागत प्रति एकड़

खेत तैयारी खर्च 5000 रुपए
खाद, कीटनाशक 9000 रुपए
बीज 25,000 रुपए
मजदूरी 5000 रुपए
खेत का ठेका 35,000 रुपए (6 माह)
मंडी खर्च 2000 रुपए
अन्य खर्च 2500 रुपए
लागत खर्च का 1.5 प्रतिशत ब्याज 7000 रुपए
किसान प्रबंधन व मेहनताना

(एचकेआरएन के न्यूनतम मानक अनुसार 14000*6)

84,000 रुपए
कुल खर्च 1,74,500 रुपए

 

आलू उत्पादन : प्रति एकड़ उपज और बिक्री

कुल उत्पादन 120 क्विंटल
औसत दर 400 रुपए प्रति क्विंटल
कुल बिक्री मूल्य 48,000 रुपए

 

प्रति क्विंटल लागत – लगभग 1450 रुपए

वर्तमान प्रति क्विंटल दर – लगभग 400 रुपए

स्त्रोत : किसान व मंडी

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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