April 5, 2026 10:11 pm

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पंचकूला सिविल सचिवालय में 9 करोड़ की ठगी का खुलासा

जिला परिषद के स्वच्छता फंड में करोड़ों की हेराफेरी, कई अधिकारी-कर्मचारी जांच के घेरे में
पंचकूला (हरियाणा): हरियाणा के पंचकूला स्थित सिविल सचिवालय से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। जिला परिषद में स्वच्छता कार्यों के लिए जारी किए गए सरकारी फंड में करीब 9 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। मामले के उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

कैसे सामने आया मामला?
सूत्रों के अनुसार जिला परिषद के स्वच्छता और ग्रामीण विकास से संबंधित कार्यों के भुगतान में अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। हाल ही में हुए आंतरिक ऑडिट और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला।
शुरुआती जांच में सामने आया कि स्वच्छता कार्यों के नाम पर जारी की गई राशि में भारी गड़बड़ी की गई। कागजों में कार्य पूर्ण दिखाए गए, जबकि जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर काम अधूरा या पूरी तरह गायब पाया गया।

घोटाले का तरीका
जांच में अब तक जो बातें सामने आई हैं, उनके अनुसार:
कुछ व्यक्तियों ने फर्जी फर्मों के नाम से बिल तैयार करवाए।
स्वीकृति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई।
सरकारी खातों से भुगतान कर राशि को अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर किया गया।
कुछ रकम कैश निकासी के माध्यम से भी निकाली गई।
प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यह राशि लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, हालांकि जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

पुलिस की कार्रवाई
मामले की जांच सेक्टर-7 थाना पुलिस कर रही है। थाना प्रभारी राजेश कुमार ने पुष्टि की है कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और संबंधित दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड व इलेक्ट्रॉनिक डाटा जब्त कर लिए गए हैं।
पुलिस ने संबंधित कर्मचारियों और ठेकेदारों से पूछताछ शुरू कर दी है। बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच भी करवाई जा रही है ताकि पैसे के ट्रेल (Money Trail) का पता लगाया जा सके।

प्रशासनिक हलचल
जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। दोष सिद्ध होने पर निलंबन और सेवा से बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई संभव है।
इसके अलावा, यदि वित्तीय अनियमितता का दायरा बड़ा पाया गया तो जांच उच्च स्तरीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है।

बड़े सवाल
करोड़ों रुपये की राशि बिना उच्च स्तर की जानकारी के कैसे जारी हुई?
भुगतान से पहले जमीनी सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
क्या इस घोटाले का दायरा अन्य जिलों तक भी फैला है?

पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
यह मामला स्वच्छता और पारदर्शिता के दावों के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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