June 29, 2026 2:55 am

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नगरदान सरोवर काँध (सरदार सरोवर बाँध); नर्मदा पर बना आधुनिक भारत का विशाल जल-आधार; भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में पवित्र

रमेश गोयत

नर्मदा, गुजरात/चंडीगढ़।  नर्मदा रीवर पर विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के मध्य निर्मित सरदार सरोवर बाँध देश की सबसे महत्त्वपूर्ण बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इसे स्वतंत्र भारत के शिल्पी और लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में नामित किया गया है।

यह बाँध न केवल गुजरात, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए भी जीवनरेखा साबित हो रहा है।

 

निर्माण का इतिहास और चुनौतियाँ

सरदार सरोवर परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 1987 में प्रारंभ हुआ। परियोजना के दौरान पर्यावरणीय, पुनर्वास और कानूनी बाधाएँ सामने आईं।

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में अधिकांश अड़चनों को दूर कर परियोजना को गति दी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने शेष कार्यों को प्राथमिकता देते हुए इसे पूर्ण करवाया।

लोकार्पण

17 सितंबर 2017 (विश्वकर्मा जयंती) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बाँध का राष्ट्र को समर्पण किया गया। यह तिथि उनके जन्मदिवस के अवसर पर ऐतिहासिक बन गई।

बाँध की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ

विशेषता

विवरण

बाँध का प्रकार

कंक्रीट ग्रेविटी डैम

मुख्य बाँध की लंबाई

1210 मीटर

अधिकतम ऊँचाई

163 मीटर

पूर्ण जलाशय स्तर (

138.68 मीटर

जलाशय की लंबाई

214 किमी

कुल जल भंडारण क्षमता

लगभग 28 मिलियन एकड़ फीट (

स्पिलवे गेट्सआ

30 रेडियल गेट

जलविद्युत उत्पादन क्षमता

इस परियोजना के तहत दो प्रमुख विद्युत गृह स्थापित किए गए हैं—

रिवर बेड पावर हाउस – 1200 मेगावाट (6 × 200  इकाइयाँ)

कैनाल हेड पावर हाउस – 250 मेगावाट (5 × 50  इकाइयाँ)

कुल स्थापित क्षमता: 1450 मेगावाट

उत्पादित बिजली का वितरण मुख्यतः मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के बीच किया जाता है।

 

सिंचाई और कृषि लाभ

लगभग 18 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा

14 जिलों में विस्तृत नहर नेटवर्क

मुख्य नहर की लंबाई: 457 किमी

गुजरात और राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों को विशेष लाभ

इस परियोजना से कच्छ, सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

पेयजल आपूर्ति

सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से—

गुजरात के 9000 से अधिक गाँव

170 से अधिक शहर

राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र

को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह परियोजना ग्रामीण और शहरी जल संकट के समाधान में मील का पत्थर साबित हुई है।

प्रभावित क्षेत्र और पुनर्वास

परियोजना के कारण—

कुल 245 गाँव प्रभावित

लगभग 46,823 परिवार विस्थापित

राज्य सरकारों द्वारा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को मुआवजा, भूमि और आवास उपलब्ध कराए गए।

 

अंतर्राज्यीय महत्व

यह परियोजना चार राज्यों—

मध्यप्रदेश

महाराष्ट्र

राजस्थान

गुजरात

के बीच जल बंटवारे के समझौते के तहत संचालित होती है।

जल आवंटन (75% निर्भरता पर):

मध्य प्रदेश – 18.25 एमएएफ

गुजरात – 9.00 एमएएफ

राजस्थान – 0.50 एमएएफ

महाराष्ट्र – 0.25 एमएएफ

 

आर्थिक प्रभाव

परियोजना लागत हजारों करोड़ रुपये

सिंचाई, पेयजल और बिजली से प्रतिवर्ष हजारों करोड़ की आर्थिक वृद्धि

कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय में वृद्धि

उद्योगों को स्थिर जल एवं बिजली आपूर्ति

पर्यटन और विकास

सरदार सरोवर बाँध के समीप विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टेच्यू यूनिटी स्थित है, जो  सरदार बलब्भई पटेल को समर्पित है।

इस क्षेत्र को केवड़िया (एकता नगर) के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ देश-विदेश से लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष आते हैं।

सरदार सरोवर बाँध केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और विकास दृष्टि का प्रतीक है।

यह परियोजना गुजरात सहित पश्चिम भारत के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को नई जीवनधारा प्रदान कर रही है। सिंचाई, बिजली, पेयजल और पर्यटन—चारों क्षेत्रों में इसका योगदान ऐतिहासिक है।

वास्तव में, सरदार सरोवर बाँध आधुनिक भारत के विकास गाथा का एक स्वर्णिम अध्याय है।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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