चंडीगढ़। हाल ही में इंदौर में सामने आई गंभीर घटना ने देशभर के शहरी प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश दिया है। वहां व्यवस्था की उदासीनता और सरकारी लापरवाही के कारण हालात घातक रूप ले बैठे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदौर में पानी और सीवरेज लाइनों की बदहाल स्थिति वर्षों से बनी हुई थी। नागरिक लगातार दूषित और दुर्गंधयुक्त काले पानी की शिकायतें करते रहे, लेकिन सरकार और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के अभाव में समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नतीजतन, विकास और बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
इसी कड़ी में सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (SIA) ने चंडीगढ़ नगर निगम और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि चंडीगढ़ भी ऐसी ही आपदा से अछूता नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि शहर के पहले चरण की लगभग 70 साल पुरानी जल पाइपलाइन और सीवरेज व्यवस्था बेहद खस्ताहाल है और कभी भी गंभीर संकट का कारण बन सकती है।
एसआईए के अनुसार, पिछले कई वर्षों से पाइपलाइनों के बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है। दूषित पानी की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 30 प्रतिशत से अधिक पानी पाइपलाइन रिसाव के कारण नष्ट हो रहा है, जिससे पानी के दूषित होने और जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.के. गर्ग ने कहा कि एसआईए ने इन गंभीर मुद्दों को लेकर प्रशासन को बार-बार पत्र लिखे, लेकिन अधिकांश पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही की सुस्ती और अधिकारियों की उदासीनता के चलते जनता की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
एसआईए ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद जनहित की अनदेखी करना अपराध के समान है। अब जबकि प्रशासक को 100 करोड़ रुपये तक की धनराशि स्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार है, तो जल पाइपलाइनों के प्रतिस्थापन और सुदृढ़ीकरण का कार्य चरणबद्ध तरीके से तुरंत शुरू किया जा सकता है।
एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि क्या सरकार केवल “व्यवस्था की विफलता” कहकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकती है। एसआईए ने दोहराया कि इंदौर जैसी किसी आपदा का इंतजार करने के बजाय समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
अंत में एसआईए ने उम्मीद जताई कि चंडीगढ़ प्रशासन अपने सक्षम प्रशासक के नेतृत्व में इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा और दशकों पुरानी जल–सीवरेज समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई करेगा, न कि जागरूक नागरिकों की आवाज को अनसुना करेगा।













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