June 17, 2026 1:33 pm

June 17, 2026 1:33 pm

HARYANA: समालखा और बरवाला को नगर परिषद घोषित करने पर कानूनी पेंच, 2022 में निर्वाचित निकायों के कार्यकाल पर संकट

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा समालखा और बरवाला नगरपालिका समितियों को नगर परिषद का दर्जा दिए जाने के बाद एक बड़ा संवैधानिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। जून 2022 में निर्वाचित दोनों नगरपालिकाओं के पदाधिकारियों के पांच वर्षीय कार्यकाल पर अब प्रश्नचिह्न लग गया है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 12 अगस्त 2025 को पानीपत जिले की समालखा नगरपालिका समिति और 26 दिसंबर 2025 को हिसार जिले की बरवाला नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर नगर परिषद घोषित किया गया। समालखा को नगर परिषद का दर्जा तत्कालीन शहरी निकाय आयुक्त एवं सचिव विकास गुप्ता के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के माध्यम से दिया गया, जबकि बरवाला को नगर परिषद घोषित करने की अधिसूचना शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता के हस्ताक्षर से सरकारी गजट में प्रकाशित हुई।

हालांकि, हाल ही में हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पारित हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 की प्रथम अनुसूची में केवल समालखा को नगर परिषद दर्शाया गया है, जबकि बरवाला को अभी भी नगर पालिका के रूप में ही उल्लेखित किया गया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

एडवोकेट ने उठाए गंभीर सवाल

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता और म्युनिसिपल कानून विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने इस पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल, विभाग के एसीएस, महानिदेशक और राज्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन भेजा है।

हेमंत कुमार के अनुसार, जून 2022 में हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश की 18 नगर परिषदों और 28 नगरपालिका समितियों के आम चुनाव कराए गए थे। इसी दौरान बरवाला नगरपालिका समिति और समालखा नगरपालिका समिति के भी चुनाव हुए थे। चुनाव के बाद 4 जुलाई 2022 को बरवाला के अध्यक्ष रमेश कुमार व 19 वार्ड सदस्यों तथा समालखा के अध्यक्ष अशोक कुमार व 17 वार्ड सदस्यों के निर्वाचन की अधिसूचना जारी की गई थी। इस आधार पर दोनों निकायों का कार्यकाल जुलाई 2027 तक वैध है।

संविधान और कानून का हवाला

एडवोकेट हेमंत ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-यू(1) और हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 12 के तहत किसी भी निर्वाचित नगर निकाय का कार्यकाल पहली बैठक से पांच वर्ष का होता है। कानून में केवल विशेष परिस्थितियों में निकाय को समयपूर्व भंग करने का प्रावधान है, लेकिन केवल दर्जा बढ़ाने के आधार पर निर्वाचित निकाय को स्वतः भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा कार्यकाल के बीच नगर परिषद के रूप में अपग्रेड कर नए चुनाव कराए जाते हैं, तो इससे वर्तमान निर्वाचित अध्यक्षों और वार्ड सदस्यों का पांच वर्षीय कार्यकाल समय से पहले समाप्त हो जाएगा, जो पूरी तरह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक होगा। ऐसी स्थिति में प्रभावित जनप्रतिनिधि अदालत का रुख कर सकते हैं।

2027 के बाद ही हो अपग्रेड : मांग

हेमंत कुमार ने स्पष्ट रूप से अपील की है कि यदि हरियाणा सरकार समालखा और बरवाला को नगर परिषद बनाना चाहती है, तो यह प्रक्रिया जुलाई 2027, यानी मौजूदा निर्वाचित निकायों का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही लागू की जाए। इससे पहले दर्जा बढ़ाना न केवल कानूनी विवाद को जन्म देगा, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के भी विपरीत होगा।

अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार इस कानूनी चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या समालखा व बरवाला के नगर परिषद बनने का फैसला पुनर्विचार के लिए जाता है या नहीं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

3 4 5 4 3 3
Total Users : 345433
Total views : 571472

शहर चुनें