ठेका कर्मियों को दिए जा रहे वित्तीय अधिकारों और कमजोर निगरानी पर उठाए सवाल, सरकार से पारदर्शिता और कड़े ऑडिट सिस्टम की मांग
चंडीगढ़,। सरकारी विभागों में सामने आ रही बैंकिंग धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ियों और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं को लेकर सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन का कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए कई मामलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि प्रशासनिक और वित्तीय शासन व्यवस्था में गहरी प्रणालीगत कमजोरियां मौजूद हैं, जिन्हें अब अलग-थलग घटनाएं मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एसोसिएशन की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सरकारी विभागों में सार्वजनिक धन को व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित करने, बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग तथा अन्य वित्तीय अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह प्रवृत्ति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और निगरानी की कमी को भी उजागर करती है।
संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को मिल रहे संवेदनशील वित्तीय अधिकार
प्रेस नोट के अनुसार हाल के समय में एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिली है, जिसमें अत्यंत संवेदनशील और बड़े वित्तीय विवेकाधिकार से जुड़े कार्य अस्थायी, आउटसोर्स या संविदा कर्मियों को सौंपे जा रहे हैं। ऐसे कर्मी नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह कठोर अनुशासनात्मक और जवाबदेही व्यवस्था के दायरे में नहीं आते, लेकिन कई विभागों में उन्हें वित्तीय निर्णयों और लेन-देन पर प्रभाव डालने की अनुमति दी जा रही है।
एसोसिएशन का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाती है बल्कि इससे वित्तीय अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।
वित्त और लेखा अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
एसोसिएशन ने वित्त और लेखा अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। अकाउंट्स ऑफिसर, एसीएफए और डीसीएफए जैसे पदों पर कार्यरत अधिकारियों का दायित्व वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं के पालन को सुनिश्चित करना होता है, लेकिन कई मामलों में उनसे अपेक्षित कठोर वित्तीय जांच कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
प्रेस नोट में कहा गया है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वित्तीय मामलों में इन अधिकारियों की सलाह और सिफारिशों पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि वित्तीय सलाह और निगरानी मजबूत नहीं होगी तो पूरे वित्तीय अनुशासन की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक तैनाती भी चिंता का विषय
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि कई विभागों में वित्तीय दृष्टि से संवेदनशील पदों पर अधिकारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहते हैं, जिससे तंत्र के भीतर हितों का नेटवर्क विकसित होने लगता है। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
इस स्थिति से बचने के लिए ऐसे पदों पर नियमित रोटेशनल ट्रांसफर लागू करना आवश्यक बताया गया है।
विभागीय सोसायटियों के संचालन पर भी उठे सवाल
प्रेस नोट में सरकारी विभागों के अधीन स्थापित विभिन्न सोसायटियों के संचालन को लेकर भी चिंता जताई गई है। अक्सर वित्तीय वर्ष के अंत में विभाग अपनी अव्ययित या अधिशेष राशि इन सोसायटियों को स्थानांतरित कर देते हैं ताकि बजट की राशि लैप्स न हो।
एसोसिएशन का कहना है कि कई बार इन सोसायटियों के वित्तीय लेन-देन कठोर सरकारी ऑडिट प्रणाली के प्रत्यक्ष दायरे से बाहर रहते हैं, जिससे यह व्यवस्था वित्तीय नियमों और निगरानी तंत्र को दरकिनार करने का माध्यम बन सकती है।
प्रशासन से उठाए ठोस कदम
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने सरकार से इस पूरे मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि:
सभी विभागों में व्यापक समीक्षा कर यह पहचान की जाए कि कहां संविदा या गैर-सरकारी कर्मियों को अनुचित वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।
वित्त और लेखा अधिकारियों की जवाबदेही व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट और मजबूत बनाया जाए।
वित्तीय रूप से संवेदनशील पदों पर कार्यरत अधिकारियों के नियमित रोटेशनल ट्रांसफर लागू किए जाएं।
सरकारी विभागों के अधीन संचालित सोसायटियों को भी सख्त ऑडिट और निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाया जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि सार्वजनिक धन जनता द्वारा सरकार को सौंपा गया एक पवित्र विश्वास है और इसके प्रबंधन में किसी भी प्रकार की ढिलाई या अपारदर्शिता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए सरकार को ठोस और निर्णायक कदम उठाने होंगे।










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