डॉ. विजय गर्ग
भारत में प्रशासनिक सेवाओं, विशेष रूप से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), को समाज में अत्यंत प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है। लंबे समय से यह सेवा शासन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती रही है। देश की विविधता को संभालने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी नीतियों को लागू करने में नौकरशाही की अहम भूमिका रही है। लेकिन जब बात क्रांतिकारी विचारों, वैज्ञानिक खोजों और वैश्विक स्तर पर गेम-चेंजिंग इनोवेशन की आती है, तो यह सवाल उठने लगता है कि क्या हमारी व्यवस्था केवल कुशल “मैनेजर” तैयार कर रही है, या फिर ऐसे “क्रिएटर” भी पैदा कर रही है जो दुनिया को नई दिशा दे सकें।
प्रशासन बनाम आविष्कार
एक आईएएस अधिकारी का मूल कार्य मौजूदा व्यवस्थाओं को कुशलतापूर्वक चलाना होता है। वे नीतियों को लागू करते हैं, योजनाओं की निगरानी करते हैं और प्रशासनिक ढांचे को सुचारु बनाए रखते हैं। इस दृष्टि से वे व्यवस्था के कुशल प्रबंधक होते हैं।
इसके विपरीत वैज्ञानिक और इनोवेटर नई चीज़ों का सृजन करते हैं।
एक वैज्ञानिक शून्य से नई खोज करता है, जबकि एक इनोवेटर पुरानी समस्याओं के लिए बिल्कुल नया समाधान प्रस्तुत करता है। उदाहरण के तौर पर डिजिटल भुगतान प्रणाली या स्वदेशी वैक्सीन जैसी उपलब्धियाँ वैज्ञानिक शोध और तकनीकी नवाचार का परिणाम हैं। प्रशासनिक तंत्र का कार्य इन नवाचारों को आम जनता तक पहुँचाना होता है, लेकिन उनकी मूल कल्पना और निर्माण प्रयोगशालाओं तथा शोध संस्थानों में होता है।
जोखिम लेने की कमी
वैज्ञानिक और इनोवेटर प्रयोग करते हैं, असफल होते हैं और फिर सीखते हुए आगे बढ़ते हैं। इतिहास में कई महान आविष्कार असंख्य असफलताओं के बाद ही संभव हुए। प्रयोग और जोखिम ही नवाचार की असली ताकत होते हैं।
लेकिन सरकारी व्यवस्था में असफलता को अक्सर नकारात्मक रूप से देखा जाता है। किसी नीति या प्रयोग के विफल होने पर जांच, आलोचना या प्रशासनिक कार्रवाई का खतरा बना रहता है। इस कारण कई अधिकारी जोखिम लेने से बचते हैं और सुरक्षित रास्ता चुनना बेहतर समझते हैं। परिणामस्वरूप प्रशासनिक ढांचा स्थिर तो रहता है, लेकिन उसमें क्रांतिकारी बदलाव की गति धीमी हो जाती है।
देश को किसकी ज्यादा जरूरत?
आज भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां कई बड़ी चुनौतियाँ सामने हैं—बढ़ती जनसंख्या, पर्यावरण संकट, ऊर्जा की मांग, कृषि समस्याएँ और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा। इन चुनौतियों का समाधान केवल प्रशासनिक प्रबंधन से नहीं होगा, बल्कि वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भी उतनी ही आवश्यकता है।
देश को ऐसे वैज्ञानिक चाहिए जो ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और नई बीमारियों का समाधान खोज सकें।
ऐसे इनोवेटर्स चाहिए जो खेती, स्वास्थ्य और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं के लिए सस्ती और प्रभावी तकनीक विकसित कर सकें।
और ऐसे उद्यमी चाहिए जो केवल सरकारी नौकरी न तलाशें, बल्कि नए उद्योग खड़े कर हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करें।
इतिहास से प्रेरणा
भारत के इतिहास में कई ऐसे महान वैज्ञानिक हुए हैं जिन्होंने देश को वैश्विक पहचान दिलाई।
A. P. J. Abdul Kalam ने मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और विज्ञान को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा।
इसी प्रकार C. V. Raman की वैज्ञानिक खोज ने भारत को विश्व विज्ञान के मानचित्र पर स्थापित किया।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार किसी भी राष्ट्र की दिशा और भविष्य को बदलने की क्षमता रखते हैं।
बदलाव की जरूरत: ‘जनरलिस्ट’ से ‘स्पेशलिस्ट’ की ओर
समय की मांग है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सोच में भी बदलाव आए। आज भी बड़ी संख्या में युवा प्रशासनिक सेवाओं को ही सफलता का सर्वोच्च प्रतीक मानते हैं। जबकि देश के विकास के लिए विशेषज्ञों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
हमें स्वास्थ्य तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों को प्रोत्साहित करना होगा। साथ ही समाज में सम्मान की धारणा भी बदलनी होगी। जब एक पेटेंट कराने वाले वैज्ञानिक या नई तकनीक विकसित करने वाले युवा को भी उतना ही सम्मान मिलेगा जितना एक कलेक्टर को मिलता है, तभी प्रतिभाशाली छात्र प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों की ओर आकर्षित होंगे।
युवाओं के लिए संदेश
आज के युवाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि देश के विकास के लिए केवल प्रशासनिक सेवाएँ ही पर्याप्त नहीं हैं। विज्ञान, अनुसंधान, तकनीक और उद्यमिता भी उतने ही महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यदि अधिक से अधिक युवा वैज्ञानिक, इंजीनियर और इनोवेटर बनेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता दोनों मजबूत होंगी।
स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शोध की संस्कृति को बढ़ावा देना, प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाना और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
प्रशासन किसी भी देश को स्थिरता और व्यवस्था प्रदान करता है, लेकिन वास्तविक परिवर्तन अक्सर विज्ञान और नवाचार के माध्यम से आता है। इसलिए भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल नौकरी पाने के बजाय नई खोज करने और नए विचार देने का साहस रखें।
जब प्रशासनिक दक्षता और वैज्ञानिक नवाचार एक साथ काम करेंगे, तभी भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकेगा।
“प्रशासन देश को स्थिरता देता है, लेकिन नवाचार देश को महान बनाता है।”
— डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, मलोट (पंजाब)











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