October 30, 2026 12:53 pm

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इस्लामाबाद में ईरान–अमेरिका उच्च स्तरीय वार्ता विफल, पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त

इस्लामाबाद | पाकिस्तान की मध्यस्थता में राजधानी Islamabad में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय वार्ता रविवार को बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई। यह वार्ता पश्चिम एशिया में जारी तनाव, परमाणु विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों के बीच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, लेकिन कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी साझा निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Baghaei ने वार्ता समाप्त होने के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि बातचीत में कुछ मुद्दों पर प्रगति जरूर हुई, लेकिन दो से तीन “मूलभूत और महत्वपूर्ण बिंदुओं” पर गहरा मतभेद बना रहा। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से कूटनीतिक प्रक्रिया को समाप्त नहीं माना गया है और भविष्य में संवाद के रास्ते खुले रहेंगे।

अमेरिका का पक्ष: “अंतिम प्रस्ताव दिया गया”
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि वार्ता का उद्देश्य शांति समझौते तक पहुंचना था, लेकिन ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कठोर रुख पर कायम रहा, जिससे किसी समझौते की संभावना समाप्त हो गई।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के सामने “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” रखा था, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े स्पष्ट प्रावधान शामिल थे, लेकिन तेहरान ने इसे स्वीकार नहीं किया।

ईरान का रुख: “कूटनीति जारी रहेगी”
ईरान ने बातचीत को पूरी तरह विफल मानने से इनकार किया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि वार्ता के दौरान कई तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन अंतिम चरण में कुछ प्रमुख बिंदुओं पर मतभेद के कारण समझौता नहीं हो सका।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार चर्चा में निम्न मुद्दे शामिल रहे—

परमाणु कार्यक्रम का भविष्य
पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति
प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया
युद्ध क्षतिपूर्ति का मुद्दा
और रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz पर नियंत्रण और सुरक्षा
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने “वैध अधिकारों और हितों” से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा और अत्यधिक शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा।

पाकिस्तान की भूमिका
वार्ता की मेजबानी करने वाले Pakistan के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने कहा कि पिछले 24 घंटों में कई दौर की “गहन और रचनात्मक” बातचीत कराई गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश भविष्य में भी संवाद जारी रखेंगे और क्षेत्रीय शांति के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।
पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया को कूटनीतिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया और कहा कि वह आगे भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है।

ऐतिहासिक महत्व और पृष्ठभूमि
यह पहली बार है जब 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद Islamic Revolution के बाद ईरान और अमेरिका के बीच इतने उच्च स्तर की प्रत्यक्ष वार्ता हुई है। दशकों से दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर तनाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता का असफल होना पश्चिम एशिया में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा सकता है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

आगे की स्थिति
वार्ता भले ही किसी समझौते पर नहीं पहुंची हो, लेकिन दोनों पक्षों ने संवाद के दरवाजे खुले रखने की बात कही है। पाकिस्तान ने भी संकेत दिए हैं कि वह भविष्य में दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।
फिलहाल, इस वार्ता के विफल रहने से क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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