रोहतक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले CM— कांग्रेस ने महिला आरक्षण के नाम पर केवल दिखावा किया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध महिलाओं के सपनों पर प्रहार
बाबूगिरी ब्यूरो
रोहतक/चंडीगढ़, 19 अप्रैल। हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में रोड़े अटकाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में हाल ही में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” से जुड़े विधेयकों का विरोध कर कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक महिला आरक्षण के नाम पर केवल दिखावा किया, लेकिन महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने की दिशा में कभी गंभीर प्रयास नहीं किए।
मुख्यमंत्री रविवार को रोहतक में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पश्चिम दिल्ली से सांसद Kamaljeet Sehrawat, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Mohan Lal Kaushik सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को देश की सर्वोच्च पंचायत संसद में विपक्ष ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” से जुड़े विधेयकों का विरोध करके बहनों-बेटियों के अधिकारों पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में जो कुछ हुआ, वह न केवल अलोकतांत्रिक था, बल्कि देश की महिलाओं के भविष्य पर बड़ा प्रहार था। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों का असली महिला-विरोधी चेहरा देश के सामने उजागर कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी महिलाओं को संवैधानिक अधिकार देने की बात आती है, विपक्षी दलों का असली चरित्र सामने आ जाता है। ये दल महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में देखते हैं, लेकिन नेतृत्व में उनकी भागीदारी से डरते हैं। यह महिलाओं को उनका राजनीतिक अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने इसे भी संकीर्ण राजनीति की भेंट चढ़ा दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक— संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक— प्रस्तुत किए। इनका उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम को और प्रभावी बनाना था।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिला आरक्षण 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था। केंद्र सरकार को यह स्पष्ट था कि यदि जनगणना और परिसीमन की लंबी प्रक्रिया का इंतजार किया जाता, तो वर्ष 2029 के आम चुनावों में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। इसी कारण प्रधानमंत्री Narendra Modi ने यह साहसिक निर्णय लिया कि इस आरक्षण को जनगणना की शर्त से अलग किया जाए, ताकि 2029 के आम चुनावों में महिलाएं संसद में प्रभावी भागीदारी दर्ज करा सकें।
सीएम सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि महिलाओं की भागीदारी कोई दया नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर इस अधिकार के रास्ते में बाधा डालने का काम किया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर विपक्ष महिलाओं के आरक्षण से इतना भयभीत क्यों है। इसका उत्तर स्पष्ट है— जिस दिन महिलाओं को पूरा राजनीतिक अधिकार मिल जाएगा, उस दिन परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति खत्म हो जाएगी। महिलाओं के सशक्तिकरण से सबसे बड़ा खतरा उन दलों को है, जिन्होंने दशकों तक महिलाओं को केवल वोट बैंक समझा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण के नाम पर वर्षों तक समितियां बनाईं, बहाने बनाए, लेकिन अधिकार नहीं दिए। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं को सम्मान देने का काम किया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परिसीमन के नाम पर झूठ और भ्रम फैलाया। दावा किया गया कि इससे कुछ राज्यों को नुकसान होगा, जबकि गृह मंत्री Amit Shah ने संसद में स्पष्ट कर दिया कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। सीटों में समान वृद्धि होगी और सभी राज्यों का संतुलन बना रहेगा।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के साथ बताया कि वर्ष 1971 में जब देश की आबादी 54 करोड़ थी, तब लोकसभा की सीटें 550 तय की गई थीं। आज भारत की जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक हो चुकी है, इसलिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना समय की आवश्यकता है, ताकि हर नागरिक का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का मॉडल सभी राज्यों में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि का था। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 और कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42 होने वाली थीं। यानी किसी का हक छीनने का नहीं, बल्कि सबका हक बढ़ाने का प्रस्ताव था।
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर मुद्दे को भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता।
उन्होंने कांग्रेस पर दोगली नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि शाहबानो मामले में महिलाओं के खिलाफ खड़ी रहने वाली कांग्रेस आज भी वही राजनीति कर रही है। दशकों तक महिला आरक्षण को तकनीकी बहानों में दबाकर रखने वाली कांग्रेस अब फिर वही साजिश दोहरा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति का मूल मंत्र हमेशा “अटकाओ, लटकाओ और भटकाओ” रहा है। तीन तलाक कानून, धारा 370 हटाने, समान नागरिक संहिता, वन नेशन वन इलेक्शन, मतदाता सूची शुद्धिकरण, वक्फ परिषद सुधार और नागरिकता संशोधन अधिनियम— हर मुद्दे पर कांग्रेस ने केवल विरोध की राजनीति की।
उन्होंने कहा कि आज गांवों में महिलाएं पंचायत चला रही हैं, शहरों में उद्योग संभाल रही हैं और हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तो संसद में उनकी भागीदारी से विपक्ष क्यों डर रहा है। सच्चाई यह है कि महिलाओं के सशक्त होने से झूठ पर टिकी विपक्ष की राजनीति की जमीन खिसक जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने केवल एक विधेयक को नहीं गिराया, बल्कि करोड़ों माताओं और बेटियों के सपनों को कुचलने का प्रयास किया है। नारी शक्ति वंदन बिल को रोककर लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार किया गया है। संसद में विपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र के मंदिर में नारी शक्ति का चीरहरण है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में देश की महिलाएं अपने वोट की ताकत से महिला-विरोधी मानसिकता रखने वाले दलों को करारा जवाब देंगी।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था, लेकिन संवैधानिक प्रक्रियाओं के कारण इसे तत्काल लागू नहीं किया जा सका। वर्ष 1976 में ही यह तय हो गया था कि अगला परिसीमन 2026 में होगा, इसलिए अधिनियम को उसी प्रक्रिया से जोड़ा गया था।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने मंडियों में फसल उठान को लेकर कहा कि सरकार ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
इस अवसर पर सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में सरकार बनने के बाद विपक्ष की जातिगत जनगणना की मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने का निर्णय लिया। इससे प्रक्रिया लंबी होने की संभावना थी, जिसके कारण महिलाओं को 2029 के चुनाव में आरक्षण का लाभ मिलने में देरी हो सकती थी। इसी कारण सरकार ने संशोधित विधेयक लाकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि 2029 के आम चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सके।
उन्होंने विपक्ष को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि देश की जनता सब देख रही है और भविष्य में इसका जवाब अवश्य देगी।












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