June 10, 2026 1:47 pm

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PANCHKULA: रायपुररानी के तहसीलदार विक्रम सिंगला की गिरफ्तारी से खुली परते, पर्ल ग्रुप की जमीन से स्टे हटाने और रजिस्ट्री मामले में बड़ा खुलासा

पहली रजिस्ट्री के 21 दिन बाद ही 4 लोगों को बेच दी गई 18 एकड़ विवादित जमीन
पंचकूला | रायपुररानी रायपुररानी के शाहपुर गांव में पर्ल ग्रुप की करीब 18 एकड़ जमीन से कथित तौर पर गलत तरीके से स्टे हटाने और उसकी रजिस्ट्री करने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि 16 अक्टूबर 2025 को जिस व्यक्ति ने यह जमीन खरीदी थी, उसने महज 21 दिन बाद ही पूरी जमीन चार अलग-अलग लोगों को बेच दी।
जानकारी के मुताबिक 6 नवंबर 2025 को पंचकूला निवासी विशाल, संजय सिंगला, राजन गोयल और संगरूर निवासी मुनीष को 4.42-4.42 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। अब विजिलेंस ब्यूरो इन चारों खरीदारों से भी पूछताछ करने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार, 16 अक्टूबर को 18 एकड़ जमीन खरीदने वाला व्यक्ति हरियाणा के राजस्व विभाग के एक अधिकारी का जानकार बताया जा रहा है। विजिलेंस इस बात की जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग के कौन-कौन से अधिकारी शामिल रहे।
स्टे हटाकर रजिस्ट्री कराने की शिकायत कई स्तरों पर दी गई थी
रायपुररानी के शाहपुर स्थित इस जमीन पर पर्ल ग्रुप से जुड़ा स्टे लगा हुआ था। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर स्टे हटाया गया और रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। इस मामले की शिकायत सीबीआई, पुलिस विभाग, मुख्य सचिव, विजिलेंस और हरियाणा के मुख्यमंत्री तक की गई थी।
30 जनवरी 2026 को विजिलेंस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की और अगले दिन 31 जनवरी को रायपुररानी के तहसीलदार विक्रम सिंगला को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी तहसीलदार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की विजिलेंस रिमांड पर भेज दिया गया।

26 सितंबर से शुरू हुई पूरी प्रक्रिया
26 सितंबर 2025 को बलदेव कौर ने पंचकूला के एसडीएम को पत्र लिखकर बताया कि रायपुररानी के शाहपुर स्थित जमीन उनके बेटे कुलबीर सिंह के नाम थी। बेटे की मौत के बाद वह इसकी कानूनी वारिस हैं। पत्र में जमीन पर लगे स्टे को हटाकर रिकॉर्ड दुरुस्त करने की मांग की गई।
उसी दिन एसडीएम ने नियम अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए पत्र रायपुररानी तहसीलदार को भेज दिया। शिकायत मिलने के महज 19 दिनों के भीतर, 15 अक्टूबर 2025 तक तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी ने तेजी दिखाते हुए जमीन से स्टे हटाकर रिकॉर्ड दुरुस्त कर दिया। इसके बाद 16 अक्टूबर को जमीन महिला के नाम दर्ज कर उसे नवीन नामक व्यक्ति को बेच दिया गया।

नवंबर में अधिकारियों तक पहुंची रजिस्ट्री की जानकारी
जमीन की रजिस्ट्री की जानकारी नवंबर 2025 में ही उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई थी। इसके बाद 4 दिसंबर 2025 को पर्ल ग्रुप की एक अन्य जमीन के मालिक, मोहाली निवासी गगनप्रीत सिंह ने भी पंचकूला एसडीएम को पत्र लिखकर स्टे हटाने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आवेदन दिया।
इससे अधिकारियों को पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका हुई। पंचकूला एसडीएम ने रायपुररानी तहसीलदार से स्टे हटाने की प्रक्रिया को लेकर जवाब तलब किया। तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया।
जनवरी में दिए गए जवाब में तहसीलदार ने नियमों के अनुसार कार्रवाई का दावा किया, लेकिन एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जानकारी डीसी पंचकूला, पुलिस कमिश्नर, विजिलेंस और मुख्य सचिव को भेज दी।

30 जनवरी को कार्रवाई, 31 को गिरफ्तारी
30 जनवरी की शाम विजिलेंस की कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव से अनुमति ली गई। उसी दिन केस दर्ज कर लिया गया और 31 जनवरी की सुबह करीब 4 बजे विजिलेंस टीम ने चंडीगढ़ स्थित आवास से तहसीलदार विक्रम सिंगला को गिरफ्तार किया। विजिलेंस ने करीब 5 घंटे तक पूछताछ और जांच की।

क्या है स्टे हटाने का नियम
यदि किसी जमीन पर कोर्ट या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा स्टे लगाया जाता है, तो जमीन मालिक को सबसे पहले जिला प्रशासन के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद जिला प्रशासन संबंधित तहसील के सब-रजिस्ट्रार से जमीन की स्थिति रिपोर्ट मंगवाता है। सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद ही स्टे हटाया जा सकता है।
इस मामले में इन्हीं नियमों के उल्लंघन का आरोप है, जिसकी जांच विजिलेंस ब्यूरो कर रहा है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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