चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र 2026 में शुक्रवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की कंप्लायंस ऑडिट रिपोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों को अपग्रेड कर शुरू किए गए प्ले स्कूलों के लिए 4,000 इलेक्ट्रिक अल्ट्रावायलेट वाटर प्यूरीफायर (EUWPs) खरीदे गए, लेकिन बुनियादी सुविधाएं—जैसे पानी की टंकी और बिजली/पानी का कनेक्शन—उपलब्ध कराए बिना ही इनकी खरीद कर ली गई। परिणामस्वरूप 2,511 प्यूरीफायर स्थापित ही नहीं हो सके और करीब 1.22 करोड़ रुपये का खर्च बेकार चला गया।
आंगनवाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल में बदलने की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020-21 के राज्य बजट में मौजूदा आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) को अपग्रेड कर 4,000 प्ले स्कूल खोलने की घोषणा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य प्री-स्कूल बच्चों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2021-22 और 2022-23 के दौरान इन अपग्रेडेड प्ले स्कूलों के लिए फर्नीचर, शिक्षण सामग्री और इलेक्ट्रिक अल्ट्रावायलेट वाटर प्यूरीफायर सहित विभिन्न सामान की खरीद की।
ओडिशा की फर्म से हुआ करार
ऑडिट में पाया गया कि अक्टूबर 2021 में विभाग ने ओडिशा की एक फर्म को 4,000 EUWPs की सप्लाई का ऑर्डर दिया। प्रति यूनिट 4,871 रुपये की दर से यह खरीद की गई और एक वर्ष की रिप्लेसमेंट गारंटी भी दी गई।
जनवरी 2022 तक सभी प्यूरीफायर की सप्लाई कर दी गई और मार्च 2023 तक संबंधित फर्म को कुल 1.95 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
4,000 में से केवल 1,489 ही चालू
नवंबर 2024 तक की स्थिति के अनुसार, 4,000 में से सिर्फ 1,489 वाटर प्यूरीफायर ही चालू हो सके। शेष 2,511 प्यूरीफायर प्ले स्कूलों में स्थापित नहीं किए जा सके।
CAG रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पानी की टंकी, बिजली कनेक्शन, पानी की सप्लाई लाइन और फिटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इन प्यूरीफायर को इंस्टॉल नहीं किया जा सका। इस दौरान गारंटी अवधि भी समाप्त हो गई, जिससे उपकरणों के खराब होने का जोखिम और बढ़ गया।
जमीनी हकीकत की अनदेखी
रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग ने जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचे की उपलब्धता की जांच किए बिना ही उपकरणों की खरीद कर ली। अधिकांश प्ले स्कूलों में न तो पानी की टंकी थी और न ही नियमित बिजली कनेक्शन।
जनवरी 2024 में विभाग ने पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) से पानी की टंकियों की आपूर्ति के लिए पैनल में शामिल फर्मों की सूची मांगी और टंकी व मोटर लगाने की अनुमानित लागत भी पूछी।
फरवरी 2024 में जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPOs) से भी कहा गया कि वे PHED द्वारा तैयार किए गए अनुमान प्रस्तुत करें। मई 2024 में महिला एवं बाल विकास विभाग, PHED और पंचायती राज विभाग की संयुक्त बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि पंचायती राज विभाग पानी की टंकी, इलेक्ट्रिक मोटर और अंदरूनी फिटिंग का अनुमान देगा।
1.22 करोड़ रुपये का नुकसान
पंचायती राज विभाग के मुख्य अभियंता ने लागत का अनुमान प्रस्तुत किया, जिस पर नवंबर 2024 तक विभागीय स्तर पर विचार जारी था।
CAG ने निष्कर्ष निकाला कि बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना 4,000 EUWPs की खरीद के कारण 2,511 प्यूरीफायर उपयोग में नहीं आ सके, जिससे लगभग 1.22 करोड़ रुपये का सार्वजनिक धन व्यर्थ गया।
बच्चों को सुरक्षित पानी देने का उद्देश्य अधूरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्री-स्कूल बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का मूल उद्देश्य पूरी तरह से हासिल नहीं हो सका।
विभागीय निदेशक ने जून 2024 में ऑडिट के दौरान बताया कि प्रारंभ में 2020-21 में पहले चरण में 1,135 प्ले स्कूलों के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था, जबकि शेष को 2022-23 में दूसरे चरण में शामिल किया जाना था। यह मान लिया गया था कि इन दो वर्षों में पानी और बिजली की व्यवस्था हो जाएगी।
हालांकि, पहले चरण में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो सकीं, इसलिए बाद में सभी 4,000 प्ले स्कूलों के लिए एक साथ प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। दिसंबर 2024 में निदेशक ने देरी के लिए बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन जारी करने में विलंब को जिम्मेदार बताया।
सैकड़ों स्कूलों में अब भी बुनियादी कमी
अगस्त 2025 में विभाग ने फील्ड रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 559 प्ले स्कूलों में पानी की टंकी नहीं थी और 465 स्कूलों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा, कई स्थानों पर पानी की सप्लाई और फिटिंग से जुड़ी अन्य कमियां भी सामने आईं।
CAG ने टिप्पणी की कि विभाग का जवाब इस तथ्य की पुष्टि करता है कि आवश्यक सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित किए बिना ही उपकरणों की खरीद की गई।
जवाबदेही तय करने की सिफारिश
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2,511 में से 1,487 प्यूरीफायर के संबंध में विभाग ने कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बताई। लंबे समय तक बिना इंस्टॉलेशन के पड़े रहने से इनके खराब होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
CAG ने राज्य सरकार को सिफारिश की है कि बिना जमीनी स्थिति की जांच किए उपकरण खरीदने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर विचार किया जाए और शेष प्यूरीफायर को जल्द से जल्द इंस्टॉल कर उपयोग में लाया जाए।
इस खुलासे के बाद विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्ष ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के संकेत दिए हैं।











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