गलतफहमियों के किस्से इतने दिलचस्प हैं,
हर र्इंट सोचती है कि दीवार मुझ पर टिकी है
देर से होने वाले कांडों को जो व्यक्ति दूर से भांप ले उसे दूरदर्शी कहा जा सकता है। और जो इन खतरों से निपटने की रणनीति बना ले उसे विजनरी कहा जाता है। इस मामले में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला की दाद देनी होगी कि उन्होंने दूर से ही भांप लिया था कि उनके साथ हरियाणा से हुए पिछले राज्यसभा चुनाव में क्या बन सकती है। इसीलिए वे हरियाणा का होते हुए भी यहां राज्यसभा की खाली सीट होने के बावजूद हरियाणा की बजाय राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार बने और जीत हासिल की। हरियाणा से राज्यसभा उम्मीदवार रहे अजय माकन शायद रणदीप जितने दूरदर्शी नहीं थे,इसलिए वो यहां के कांग्रेसी विधायकों की दूरदर्शिता की चपेट में आ गए और चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा से मात खा गए। एक तो होती है रणदीप जैसी दूरदर्शिता। एक होती है कांग्रेसी दूरदर्शिता। शायद इसी के तहत हरियाणा के ज्यादातर कांग्रेसी विधायकों को राज्यसभा चुनाव से पहले अब हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर ले जाया गया है। ऐसा काम कांगे्रस ने अजय माकन के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी किया था जब इन विधायकों को कई दिन तक छत्तीसगढ के रायपुर के एक रिजोर्ट में रखा गया था। हालांकि इस सारी कवायद का कांग्रेस को फायदा नहीं हुआ था। तब छत्तीसगढ में कांग्रेस की सरकार थी और अब हिमालच प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। ये तो अच्छा है कि अभी चंद राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। अगर कांगे्रस की सरकार ना हो तो पार्टी के सामने ये बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता था कि राज्यसभा चुनाव या ऐसे ही किसी हालात में कांगेसी विधायकों को कहां लेकर जाया जाए? वैसे ये काम अकेले कांग्रेस ही करती हो ऐसा नहीं है। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू की सरकार गिराने की कोशिश के दौरान हिमाचल के कुछ विधायकों को चंडीगढ के ललित होटल में रखा गया था। इसी तरह राजस्थान के अशोक गहलोत सरकार को पटखनी देने की कोशिश में भी राजस्थान के कई विधायकों को गुरूग्राम के पास आईटीसी ग्रैंड भारत में कई दिन तक रखा गया था। उड़ीसा जहां भाजपा की सरकार साक्षात मौजद है वहां के भाजपा विधायकों को भी राज्यसभा चुनाव के मददेनजर तीन बसों में भर कर एक होटल में कुछ दिन के लिए भेजा गया है। मतलब ये कि एक जैसे हालात में सभी राजनीतिक दलों का चाल, चरित्र, चेहरा एक जैसा हो जाया करता है। संभवत ऐसे ही किसी हालात पर जौन एलिया ने कभी लिखा था..
अब नहीं कोई बात खतरे की
अब सभी को सभी से खतरा है
लगता तो नहीं,मगर हो भी सकता है
हरियाणा में राज्यसभा की खाली हुई दो सीटों के चुनाव के लिए विधायकों के संख्या बल के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस को एक एक सीट आनी तय हैं। भाजपा के पूर्व सांसद संजय भाटिया ने भाजपा उम्मीदवार और सतीश नांदल ने भाजपा समर्थित नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। संजय भाटिया की जीत पर कोई संशय नहीं है। नांदल को चुनाव जीतने के लिए अन्य के अलावा कांगेस के नौ विधायकों की वोट भी की जरूरत है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस जुनाव में अतीत की तरह इस दफा भी खेला होने जा रहा है? लगता तो नहीं,लेकिन हो भी सकता है। एक सवाल ये भी है कि क्या भाजपा वालों ने बिना समुचित तैयारी के ही नांदल का नामांकन भरवा दिया होगा? हरियाणा में अतीत में राज्यसभा के चुनाव में दो दफा कांग्रेस के विधायक ये काम गाजेबाजे के साथ कर चुके हैं। एक दफा तो पैन या पैन की स्याही बदली गई तो एक दफा कांग्रेसियों ने क्रास वोटिंग कर दी। अब जबकि हरियाणा विधानसभा के चुनाव में करीब साढे तीन बरस का समय बाकी है तो ये देखना रोचक होगा कि क्या कांग्रेस के कुछ विधायक इतना बड़ा रिस्क उठाने की स्थिति में हैं कि वो क्रास वोटिंग कर सकें? ऐसे में एक संभावना ये भी उत्पन्न हो रही है कि हो सकता है कि इस दफा स्क्रिप्ट कुछ अलग लिखी जाए। कुछ अलग तरीके से कांड किया जाए। अगर इस मामले में भाजपा ने कुछ सैटिंग करनी होगी-व्यूह रचना रचनी होगी तो वो बहुत पहले से इसकी तैयारी हो चुकी होगी। जहां जहां, जिस से जो बात होनी होगी, वो कभी की हो चुकी होगी। ये मानना बेवकूफी होगी कि इस तरह की तैयारी मतदान से दो चार दिन पहले होती होगी। इस तरह के मामलों में अमूमन ये काम कई सप्ताह या महीनों पहले ही हो जाया करता है। मतदान के दिन तो महज उस तैयारी का इजहार ए मोहब्बत हुआ करता है। कांग्रेस उम्मीदवार कर्मबीर बौद्ध और भाजपा समर्थित सतीश नांदल दोनों ही अपनी अपनी जीत के लिए आशावान प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में ये देखना रोचक होगा कि इस दफा हरियाणा से राज्यसभा के चुनाव में कौन उम्मीदवार किस तरह से बाजी मारता है। इस हालात पर कहा जा सकता है..
मेरे ही लहू पर गुजर-औकात करो हो
मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो
दिन एक सितम, एक सितम रात करो हो
वो दोस्त हो दुश्मन को भी मात करो हो
हम खाक नशीं, तुम ऊंची अटारी रहते हो
पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो
हम को जो मिला है वो तुम्हीं से मिला है
हम और भुला दें तुम्हें, क्या बात करो हो
यूं तो कभी मुंह फेर के देखो भी नहीं हो
जब वक्त पड़े तो आदर सत्कार करो हो
दामन पे कोई छींट न खंजर पे कोई दाग
तुम कत्ल करो हो कि करामात करो हो
कारनामा करने में कलाकार है कांग्रेसी
विधायकों कोे तोड़ने-दल बदल करवाने की कला में हरियाणा के कांग्रेसी कम उस्ताद नहीं है। वर्ष 2009 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की 90 में से 40 सीट आई थी। सरकार बनाने के लिए बहुमत के लिए उसे छह और सीटों की जरूरत थी। तब हजकां के छह विधायक चुने गए थे। हजकां के पांच विधायक अचानक से एक दिन कांग्रेस के खेमे में प्रकट हो गए। कांग्रेस को समर्थन देने वाले इन पांच विधायकों में से दो सतपाल सांगवान और राव नरेंद्र सिंह फिर हुडडा सरकार में मंत्री भी बने पाए गए। जिन पूर्व सीएम भजनलाल को कभी जोड़ तोड़ में और दल बदलने-बदलवाने में उस्ताद माना जाता था उनके सुपुत्र हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई अपने विधायकों को साथ नहीं रख पाए। कुलदीप कोये खबर भी नहीं हुई कि कब उनको अकेला छोड़ कर उनके बाकी पांच विधायक फुर्र हो गए।
दुष्यंत चौटाला ने दिखाई होशियारी
इस मामले में जजपा के दुष्यंत चौटाला होशियार रहे। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की 40 और जजपा की दस सीट आई। दुष्यंत ने झट से भाजपा को समर्थन दे दिया। सरकार में डिप्टी सीएम का पद और कई मलाईदार विभाग पा लिए। अगर वो इस मामले में जरा सी भी कोताही करते तो भाजपा उनके विधायकों को कभी का लेकर उड़न छंू हो जाती और दुष्यंत हाथ मलते रह जाते। जो लोग आज दुष्यंत पर ये तोहमत लगाते हैं कि वो सत्ता की मलाई चाटने के लिए भाजपा की गोद में बैठ गए,वही लोग तब ये कहते हुए मिलते कि क्या दुष्यंत ने कुलदीप बिश्नोई के इतिहास से कुछ सबक नहीं सीखा? जब दुष्यंत को ये पता था कि भाजपा वाले उनके माल पर हाथ साफ कर देंगे तो उन्होंने समय रहते भाजपा सरकार में हिस्सेदारी क्यों नहीं की? दुष्यंत ने कुलदीप बिश्नोई वाला बलंडर नहीं किया। भाजपा सरकार में तब तक साथ रहे, जब तक उनको बीच चौराहे पर अकेला नहीं छोड़ दिया। एक तरह से दुष्यंत और भाजपा ने एक दूसरे का जी भर के इस्तेमाल किया।
एनएक्सटी समिट में मोदी ने रंग जमाया
आईटीवी समूह का नई दिल्ली के भारत मंडप में आयोजित तीन दिवसीय एनएक्सटी समिट शनिवार को सम्पन्न हो गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत,हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी,दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता समेत कई देशों के पूर्व प्रधानमंत्रियों, कई केंद्रीय मंत्रियों व प्रबुद्ध लोगों ने शिरकत की। इस प्रतिष्ठित समिट में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा और एनएक्सटी की चेयरपर्सन डा.ऐश्वर्या पंडित काफी सक्रिय रही। कार्तिकेय शर्मा और डा.ऐश्वर्या पंडित ने समिट में बताया कि नमो शक्ति रथ नामक मोबाइल यूनिट दुनिया की सबसे बड़ी ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मशीन है। महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च को हमने पांच हजार से अधिक महिलाओं की कैंसर जांच करवा कर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में जगह बनाई। कार्तिकेय और ऐश्वर्या ने आयोजन स्थल पर कुर्सियां लगाने जैसी सूक्ष्म व्यवस्थाओं को जांचने से लेकर हर छोटे बड़े काम में खुद को झौंके रखा। समिट में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिन कामों को कभी असंभव बताया जाता था उन कामों को केंद्र सरकार ने चुटकियों में कर दिखाया। कश्मीर में धारा 370 खत्म की। मुस्लिम महिलाओं के लिए ट्रिपल तलाक खत्म किया। 50 करोड़ गरीब परिवारों को जनधन योजना के तहत बैंक खातों से जोड़ा। इस हालात पर आल्मा इकबाल का शेर है…
दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं,ताकत ए परवाज मगर रखती है
थी फरिश्तों को भी हैरत कि ये आवाज है क्या
अर्श वालों पे भी खुलता नहीं ये राज है क्या











Total Users : 291250
Total views : 493505