चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को विधानसभा में प्राकृतिक खेती पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी जनप्रतिनिधियों से इस विषय को दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यह हमारा दायित्व है कि हम न केवल खुद प्राकृतिक खेती अपनाएं, बल्कि किसानों को इसके प्रति जागरूक भी करें।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने आचार्य देवव्रत का स्वागत करते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और प्राकृतिक जीवन शैली के सशक्त प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया। आचार्य देवव्रत ने अपने जीवन को समाज सेवा, शिक्षा और प्राकृतिक खेती के प्रसार के लिए समर्पित किया है और पूरे देश में किसानों को इसके लिए जागरूक कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती का महत्व और मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में किसान अत्यधिक मात्रा में पेस्टिसाइड, यूरिया और रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे हैं, जिससे मिट्टी और पानी प्रदूषित हो रहे हैं और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में प्राकृतिक खेती का मॉडल किसानों के लिए नई दिशा प्रस्तुत करता है।
आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में गुरुकुल, कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ भूमि में विकसित प्राकृतिक कृषि फार्म किसानों के लिए आदर्श उदाहरण है। यहां न तो कीटनाशक का उपयोग होता है और न ही रासायनिक खाद। खेती में केवल गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, घनामृत और बीजामृत का प्रयोग किया जाता है। यह पद्धति कम लागत पर आधारित है और आर्थिक रूप से किसानों के लिए लाभकारी है।
हरियाणा में प्राकृतिक खेती योजना और प्रगति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में यह योजना 2022 में शुरू की गई थी। इसके तहत एक प्राकृतिक खेती पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जिसमें 31,873 एकड़ क्षेत्र के लिए 19,723 किसानों ने अपना सत्यापन करवाया है। अब तक 12,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा हुमेटी, जींद ने प्रदेश के सभी सरपंचों को एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण भी प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत प्राकृतिक खेती उत्पाद की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। देसी गाय की खरीद पर 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। अब तक 2,500 किसानों को 4 ड्रम प्रति किसान की दर से 75 लाख रुपये और 523 देसी गाय की खरीद के लिए 1.30 करोड़ रुपये की अनुदान राशि वितरित की जा चुकी है।
बजट 2026-27 में नई पहल
सैनी ने कहा कि बजट 2026-27 में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की गई हैं। किसानों को जैविक खेती प्रमाणीकरण के लिए ‘हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी’ को प्रमाणन संस्था बनाया जाएगा। एपीडा से प्रमाणित किसानों को अगले 5 वर्षों तक 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष अनुदान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन और विधानसभा में उठाए गए इस विषय के कारण हरियाणा के किसान प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से बढ़ेंगे।











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