नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज होने जा रही है। दिल्ली विधानसभा का बहुप्रतीक्षित शीतकालीन सत्र आज, 5 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है। चार दिन तक चलने वाले इस सत्र में राजधानी से जुड़े कई अहम विधायी कार्यों के साथ जनहित के मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।
सत्र के पहले दिन से ही सदन में हंगामे के संकेत मिल रहे हैं। विपक्षी आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। वायु प्रदूषण, यमुना की सफाई, शहर में गंदगी, सड़कों की खराब हालत, मोहल्ला क्लिनिक बंद होने और सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसे मुद्दों पर विपक्ष सत्ताधारी भाजपा से जवाब मांग सकता है। इन मुद्दों को लेकर सदन में तीखी बहस के आसार हैं।
दूसरी ओर, सरकार भी इस सत्र में कई अहम अनुपूरक अनुदान मांगों को पारित कराने की तैयारी में है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान सत्र के प्रमुख एजेंडे में शामिल किया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों द्वारा जनहित से जुड़ी नई घोषणाएं किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
कार्यक्रम के अनुसार, सदन की कार्यवाही से पहले राष्ट्रगान होगा। सुबह 11 बजे उपराज्यपाल अपने अभिभाषण के साथ शीतकालीन सत्र की औपचारिक शुरुआत करेंगे। इसके 30 मिनट बाद ‘वंदे मातरम्’ के साथ सदन की नियमित कार्यवाही शुरू होगी।
कार्यवाही की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता दिल्ली विधानसभा के पूर्व सदस्यों के निधन की जानकारी सदन को देंगे और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद उपराज्यपाल के अभिभाषण की हिंदी और अंग्रेजी प्रतियां सदन के पटल पर रखी जाएंगी, जिन्हें विधानसभा सचिव रंजीत सिंह प्रस्तुत करेंगे। यह शीतकालीन सत्र 5 जनवरी से 8 जनवरी तक चलेगा, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर सदन की सहमति से इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।
इन मुद्दों पर रहेगा खास फोकस
दिल्ली सरकार ने बताया है कि चार दिवसीय सत्र के दौरान राजधानी में वायु प्रदूषण रोकने के लिए किए गए वैज्ञानिक उपायों पर खुली चर्चा होगी। इसके अलावा प्रश्नकाल भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याएं सदन में उठा सकेंगे।
सत्र के दौरान कथित ‘फांसी घर’ मामले पर भी हंगामा होने की संभावना है। कार्य मंत्रणा समिति के दो बार समन भेजने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़लान समिति के सामने पेश नहीं हुए हैं। ऐसे में भाजपा विधायक प्रद्युम्न राजपूत की अध्यक्षता वाली समिति इस मुद्दे को सदन में उठाने की तैयारी कर चुकी है।
क्या है ‘फांसी घर’ विवाद
केजरीवाल सरकार के कार्यकाल के दौरान दिल्ली विधानसभा के एक कमरे को ‘फांसी घर’ बताया गया था। मौजूदा भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि वही कमरा दरअसल ‘टिफिन रूम’ है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस मामले में जनता को गुमराह किया। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए समिति बनाई गई है, जिस पर अब विधानसभा सत्र में चर्चा होने की संभावना है।











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