June 13, 2026 11:27 am

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PANCHKULA: ग्रीन बेल्ट विवाद में हाईकोर्ट सख्त, HSVP के मुख्य प्रशासक और एस्टेट ऑफिसर को बनाया पक्षकार, 12 जून को तलब

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने HSVP अधिकारियों को किया तलब, ग्रीन बेल्ट हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 10 जून। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा सेक्टरों में मकानों के सामने विकसित ग्रीन बेल्टों और कथित अतिक्रमणों को हटाने का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। अचसवीपी एचएसवीपी की कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान HSVP के मुख्य प्रशासक डॉ. चंद्र शेखर खरे और एस्टेट ऑफिसर सुरिंदर लाठर को अवमानना याचिका में पक्षकार बनाने के आदेश देते हुए 12 जून को नोटिस जारी किया है।
यह मामला संदीप कोटला एवं अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारियों द्वारा सेक्टरों में ग्रीन बेल्टों को हटाने तथा संरचनाओं के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जारी रखी जा रही है। उनका कहना है कि अदालत में मामला लंबित होने और नोटिस जारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं।

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अदालत ने माना, अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी
न्यायमूर्ति मनदीप पन्नू की अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से एक आवेदन दायर कर HSVP के मुख्य प्रशासक डॉ. चंद्र शेखर खरे और एस्टेट ऑफिसर सुरिंदर लाठर को मामले में पक्षकार बनाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये दोनों अधिकारी सीधे तौर पर विवादित कार्रवाई से जुड़े हुए हैं और इनके बिना मामले का प्रभावी निपटारा संभव नहीं है।
अदालत ने आवेदन में किए गए तथ्यों पर विचार करते हुए इसे स्वीकार कर लिया और दोनों अधिकारियों को प्रतिवादी संख्या 3 एवं 4 के रूप में शामिल करने का आदेश दिया। साथ ही संशोधित पक्षकार सूची को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश भी दिए गए।

2023 के आदेश की अवहेलना का आरोप
अवमानना याचिका में कहा गया है कि 21 सितंबर 2023 को हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी संरचना को हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को विधिवत नोटिस दिया जाए तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए कारण सहित आदेश पारित किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद प्रशासन और HSVP अधिकारियों ने कथित अतिक्रमण हटाने तथा ग्रीन बेल्ट से जुड़े निर्माणों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जो अदालत के आदेशों की अवहेलना है। इसी आधार पर अवमानना याचिका दायर की गई है।

सरकार ने मांगा समय, कोर्ट ने दी अंतिम मोहलत
मामले की पिछली सुनवाई 8 जून को हुई थी, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। राज्य की ओर से उपस्थित सरकारी वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। अदालत ने संबंधित विभाग के ऐसे जिम्मेदार अधिकारी को भी अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे जो मामले की पूरी जानकारी रखता हो।
बुधवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। सरकारी पक्ष ने फिर से अतिरिक्त समय की मांग की। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया।

कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि पिछली सुनवाई में जिन अधिकारियों की उपस्थिति के निर्देश दिए गए थे, उनकी जगह ऐसा अधिकारी उपस्थित हुआ जो मामले के तथ्यों से पूरी तरह अवगत नहीं था। अदालत ने कहा कि उपस्थित अधिकारी न्यायालय की संतोषजनक सहायता करने की स्थिति में नहीं था।
इस पर कोर्ट ने निर्देश दिए कि अगली सुनवाई पर HSVP का एक जिम्मेदार अधिकारी, जो सक्षम प्राधिकारी स्तर से कम न हो, तथा जिला नगर योजनाकार (DTP) कार्यालय का भी एक वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों को मामले से संबंधित सभी तथ्यों और 16 अप्रैल तथा 2 जून 2026 के आदेशों के तहत प्रस्तावित कार्रवाई की पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होने को कहा गया है।

12 जून को होगी अहम सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 जून 2026 निर्धारित की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार अपना जवाब क्या दाखिल करती है और HSVP अधिकारी अदालत के समक्ष ग्रीन बेल्ट हटाने की कार्रवाई को किस आधार पर उचित ठहराते हैं। यह मामला शहर के कई सेक्टरों के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका प्रभाव भविष्य में ग्रीन बेल्ट और फ्रंट ओपन स्पेस से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।

प्रमुख बिंदु
ग्रीन बेल्ट हटाने की कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका।
HSVP के मुख्य प्रशासक और एस्टेट ऑफिसर को बनाया गया पक्षकार।
2023 के हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना का आरोप।
राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर।
HSVP और DTP के वरिष्ठ अधिकारियों को 12 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश।
अगली सुनवाई 12 जून 2026 को होगी।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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