आरोपी के खाते में मिला 5.47 करोड़ रुपये के संदिग्ध साइबर फ्रॉड का लेन-देन, देशभर में 18 शिकायतें दर्ज
रमेश गोयत
पंचकूला, 27 जून:
पंचकूला पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्ग से 80 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी को तेलंगाना से गिरफ्तार किया है। सेक्टर-20 स्थित साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने आरोपी रंजारला रामूलू निवासी तेलंगाना को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोपी के बैंक खाते से देशभर में करीब 5 करोड़ 47 लाख रुपये के संदिग्ध साइबर फ्रॉड लेन-देन का खुलासा हुआ है। आरोपी के खिलाफ देशभर में साइबर ठगी से जुड़ी 18 शिकायतें दर्ज हैं।
इस मामले में पुलिस पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें सौरभ कुमार निवासी मैनपुरी, उत्तर प्रदेश और पाथुकर मुरली कृष्ण निवासी हैदराबाद, तेलंगाना शामिल हैं।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह के अनुसार, यह मामला पिंजौर निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत पर 19 जनवरी 2026 को दर्ज किया गया था। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने खुद को ट्राई और सीबीआई अधिकारी बताकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें डराया। ठगों ने झूठा दावा किया कि उनके नाम से जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल अपराध में हुआ है और उनके बैंक खाते में करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन हुआ है।
आरोपियों ने महाराष्ट्र पुलिस के फर्जी दस्तावेज और लोगो दिखाकर बुजुर्ग को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। परिवार को नुकसान पहुंचाने और जेल भेजने का डर दिखाकर बैंक खातों की जांच के नाम पर पीड़ित से 80 लाख 9 हजार 500 रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। इसमें से करीब 62 लाख रुपये वर्तमान आरोपी रामूलू के खाते में पहुंचे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनी का बैंक खाता खुलवाया था, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम मंगवाने के लिए किया गया। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और फिर उनकी पूछताछ के आधार पर 22 जून को तेलंगाना के निजामाबाद जिले से तीसरे आरोपी को दबोचा।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी को तेलंगाना कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पंचकूला लाया गया। पूछताछ पूरी होने के बाद आरोपी को अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
डीसीपी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे पुलिस, सीबीआई, ईडी, ट्राई, आरबीआई या अदालत फोन, वीडियो कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर डराए या पैसे जमा करवाने का दबाव बनाए तो तुरंत कॉल काट दें और इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। साथ ही नजदीकी साइबर थाना या पुलिस से तुरंत संपर्क करें।














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