प्रदेश की सड़कों पर हजारों टन कचरा, बरसाती मौसम में बीमारियां फैलने का खतरा
कर्मचारियों से टकराव छोड़ संवाद के जरिए समाधान निकाले सरकार
चुनाव में कच्चे कर्मचारियों से किए वादे पूरे करे सरकार, जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेने की जरूरत
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 8 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने प्रदेशभर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और उससे उत्पन्न हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों और समय रहते संवाद न करने के कारण आज सबसे निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी अपनी मांगों के लिए बार-बार हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इसका खामियाजा कर्मचारियों के साथ-साथ प्रदेश की आम जनता को भी भुगतना पड़ रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रदेश के सभी 87 नगर निकायों में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सड़कों पर करीब 2200 टन कचरा जमा हो गया है, जबकि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ठेके और कच्चे करीब 11 हजार कर्मचारियों को सफाई कार्य में लगाया गया है। इसके बावजूद अनेक शहरों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। यह स्थिति बताती है कि नियमित सफाई कर्मचारियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
सांसद ने कहा कि यह केवल सफाई व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, रोजगार की सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा प्रश्न भी है। कर्मचारी लंबे समय से नियमित करने, रोजगार की सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं को टकराव या प्रशासनिक दबाव के नजरिए से देखने के बजाय संवेदनशीलता के साथ उनका समाधान करना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने कच्चे कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा और नियमितीकरण को लेकर बड़े-बड़े भरोसे दिए थे। सरकार बनने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान होगा, लेकिन आज भी हजारों कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सरकार को चुनाव के समय किए गए वादों की स्पष्ट स्थिति जनता और कर्मचारियों के सामने रखनी चाहिए तथा पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए पारदर्शी और न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सफाई कर्मचारी समाज और शहरों की स्वच्छता व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जो कर्मचारी प्रतिदिन गंदगी और कचरे के बीच काम करके शहरों को स्वच्छ रखते हैं, उनकी समस्याओं की अनदेखी उचित नहीं है। कर्मचारियों को बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर होना सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्तमान समय में हरियाणा में बरसात का मौसम चल रहा है। सड़कों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में लंबे समय तक कचरा जमा रहने से जलभराव के बीच संक्रमण, मच्छरों और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इस विवाद को लंबा खींचना जनस्वास्थ्य के लिहाज से भी उचित नहीं है। सरकार और नगर निकायों को तत्काल ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे लोगों को गंदगी के कारण परेशानी न उठानी पड़े।
सांसद ने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों की जायज और न्यायोचित मांगों के समाधान के लिए बातचीत और संवेदनशील दृष्टिकोण की पक्षधर है। कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ आम जनता की सुविधा भी सर्वोपरि रहनी चाहिए। आंदोलन लंबा चले, शहरों में कचरा जमा हो और जनता परेशान हो, ऐसी स्थिति किसी के हित में नहीं है।
कुमारी सैलजा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की कि सरकार सफाई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को तत्काल वार्ता के लिए बुलाए, उनकी मांगों पर समयबद्ध निर्णय ले और जिन मांगों को स्वीकार किया जा सकता है, उनके संबंध में स्पष्ट कार्ययोजना तथा समयसीमा घोषित करे। कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक संवाद स्थापित कर हड़ताल समाप्त करवाना और प्रदेश की सफाई व्यवस्था को तत्काल सामान्य करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।














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