छह माह में पूरा होगा निर्माण कार्य, राज्यपाल ने गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के दिए निर्देश
रमेश गोयत
पंचकूला, 8 अगस्त। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने शनिवार को सेक्टर-1, पंचकूला स्थित मदर टेरेसा साकेत ऑर्थोपेडिक अस्पताल में बनने वाली पेशेंट लिफ्ट की आधारशिला रखी। लिफ्ट की स्थापना पर करीब 73.31 लाख रुपये की लागत आएगी और इसे निर्धारित समय सीमा के अनुसार छह माह के भीतर तैयार किया जाना है।
इस अवसर पर राज्यपाल के साथ लेडी गवर्नर मित्रा घोष भी मौजूद रहीं। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि लिफ्ट का निर्माण एवं स्थापना निर्धारित नियमों और तकनीकी मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य में गुणवत्ता के उच्चतम मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
मरीजों और परिजनों की सुरक्षा पर विशेष जोर
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि अस्पताल में स्थापित की जाने वाली पेशेंट लिफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लिफ्ट निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली हो और उसकी सुरक्षा मानकों के अनुरूप जांच सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति पर नियमित निगरानी रखने को भी कहा, ताकि परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सके और मरीजों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
अस्पताल की सुविधाओं का किया निरीक्षण
पेशेंट लिफ्ट के शिलान्यास के बाद राज्यपाल ने मदर टेरेसा साकेत ऑर्थोपेडिक अस्पताल परिसर का विस्तृत दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा एवं अन्य सुविधाओं का जायजा लिया।
दौरे के दौरान राज्यपाल ने अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने मरीजों से उनके स्वास्थ्य, इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल में मिल रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
राज्यपाल ने अस्पताल प्रबंधन को मरीजों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से ओपीडी के बाहर प्रतीक्षा कर रहे मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का ध्यान रखने को कहा।
ओपीडी के बाहर पंखों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश
राज्यपाल ने अस्पताल के निदेशक को निर्देश दिए कि ओपीडी के बाहर मरीजों और उनके परिजनों के लिए पंखों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें अपनी बारी का इंतजार करते समय गर्मी अथवा उमस के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीज पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से गुजर रहे होते हैं, इसलिए उनके लिए प्रतीक्षा क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध होना जरूरी है।
ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक उपकरणों का लिया जायजा
राज्यपाल ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां उपलब्ध नई मशीनों और चिकित्सा उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अस्पताल में इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक उपकरणों तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही उपचार सुविधाओं के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
इसके अलावा राज्यपाल ने अस्पताल के निजी वार्ड, प्रतीक्षा कक्ष, पेयजल व्यवस्था, मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए उपलब्ध शौचालयों तथा इलेक्ट्रोथेरेपी कक्ष का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई, मरीजों की सुविधा और विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण
अस्पताल दौरे के दौरान राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और लेडी गवर्नर मित्रा घोष ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत अस्पताल परिसर में पौधारोपण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल के सचिव विजय कुमार भाविकट्टी, राज्यपाल के एडीसी स्क्वाड्रन लीडर पी. भरत, मदर टेरेसा साकेत ऑर्थोपेडिक अस्पताल के निदेशक डॉ. वी.के. नागपाल, उपायुक्त सतपाल शर्मा, पंचकूला की पुलिस उपायुक्त अदिति सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पेशेंट लिफ्ट के निर्माण से अस्पताल में आने वाले मरीजों, विशेषकर ऑर्थोपेडिक उपचार करा रहे मरीजों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। छह माह में परियोजना पूरी होने के बाद अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के आवागमन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।














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