October 11, 2026 7:22 am

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समाधान शिविरों में आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर करें समाधान – मुख्यमंत्री

समाधान शिविर सरकार की फ्लैगशिप योजना, गत वर्ष के दौरान शिविरों में 55365 शिकायतों का किया समाधान

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 9 अक्तूबर –  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि समाधान शिविर सरकार की फ्लैगशिप योजना है। इसलिए सभी अधिकारी हर जिलों में लगाए जाने वाले शिविरों में आने वाली समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें। हर समस्या का समाधान नवीनतम तकनीकी का लाभ उठाते हुए करें जिससे कोई भी समस्या लंम्बित नही रहेगी।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को चण्डीगढ़ में समाधान प्रकोष्ठ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के ओएसडी बीबी भारती, स्पेशल आफिसर भोपाल सिंह खदरी भी मौजूद रहे। इसके अलावा सभी जिलों के उपायुक्त एवं प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे जुड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान प्रकोष्ठ शिकायत निवारण प्रक्रिया दोहरी सत्यापन व्यवस्था एवं राज्य स्तरीय कार्रवाई का ढांचा है। इसमें समस्याओं को रिओपन कर विस्तार से समीक्षा की जाती है और संबंधित शिकायतकर्ता से फोन करके उसके बारे में जानकारी ली जाती है। इसलिए राज्य स्तर पर 5591 शिकायतें दोबारा खोली गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान समाधान शिविरों में 92848 शिकायतें आई, जिनमें से 55365 शिकायतों का समाधान किया गया।

40000 लोगों से फोन कर समस्या के समाधान बारे ली जानकारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान की गई शिकायतों में से 40000 शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन कर समस्या के समाधान बारे राज्य स्तर पर जानकारी ली गई तथा 11500 शिकायतों का रिओपन होने के बाद निवारण हुआ है। यह बहुत ही सराहनीय कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि रिओपन प्रतिशत अधिक नहीं होना चाहिए, जिन जिले की 35 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें रिओपन हुई हैं तो वे जिले स्टेट एवरेज में आने के लिए बेहतर कार्य करें।

औपचारिकता नहीं समस्या का समाधान निकालने का करें कार्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी शिविर में आई समस्याओं को लेकर कोई औपचारिकता न करते हुए, उनका समाधान निकालने का कार्य करें। यदि इन समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो जाता है, तो जनता को उनका तत्काल लाभ मिलेगा। जनता से सीधे मिलें और समस्या बारे विस्तार से जानकारी लें, जिससे उनकी सुनवाई एवं समाधान बेहतर किया जा सकेगा और समस्या दोबारा भी नहीं आएगी। इसलिए समाधान शिविर में आए व्यक्ति की समस्या के निवारण करने के कार्य में तेजी लाए।

समाधान शिविर में जिम्मेवार अधिकारी की लगाएं डयूटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी पूर्ण तालमेल एवं आपसी सामंजस्य के साथ समस्याओं का निपटान करें। इसके अलावा, हर समाधान शिविर में किसी जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। यदि ऐसा नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा जिलों से एमिनेंट पर्सन भी शिविर में अवश्य शामिल किए जाए। उन्होंने कहा कि शिविर की समस्याओं के समाधान की प्रकाशित विज्ञप्ति और एटीआर भी समय पर अपलोड की जाए।

हर जिले से नई पॉलिसी हेतू 10 सुझाव अवश्य भेंजे

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान शिविर की शिकायतों का उपायुक्त स्वयं पढ़कर सर्वेक्षण एवं निपटारा करें। इसके अलावा सभी एसडीएम भी शिकायतों को पढ़कर ही निपटाएं। यदि कुछ समस्याओं में पॉलिसी बनाने से जनता को राहत मिलती है तो पॉलिसी बनाकर कार्य किया जाएगा। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी 10 दिन में हर जिले से कई तरह के 10 सुझाव अवश्य भेंजे। उन्होंने कहा कि कई समस्याओं में पोलिसी के कारण दिक्कतें आ रही हैं तो वह अधिकारियों की इंटरवेंशन से ही दूर होंगी।

सफाई से संबंधित शिकायतें निपटाने हेतू चलाएं विशेष सफाई अभियान

मुख्यमंत्री ने सोनीपत, रोहतक, पानीपत, झज्जर, पंचकूला, सिरसा के उपायुक्तों से बात करते कहा कि उनके समक्ष आने वाली शिकायतों में 10 प्रतिशत शिकायतें रिओपन की गई है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिकायतें डिमांड, प्रोप्रटी आईडी एवं पुलिस से संबंधित रही है। उन्होंने कहा कि डिमांड वाली समस्याओं को अलग कर मुख्यालय भेजा जाए तथा सफाई व्यवस्था से संबंधित शिकायतों को निपटाने के लिए अधिकारी सुबह के समय विशेष सफाई अभियान चलाएं। अधिकारी सुबह के समय सफाई अभियान चलाएंगे तो शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त होगी।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि सफाई के साथ सड़कों के गड्ढे भरने का कार्य भी करवाया जाए। सफाई एवं गड्ढे भरने के लिए वाहन भी सभी स्थानीय निकायों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होनें कहा कि जिन शहरों में ठेकेदार सफाई को लेकर निर्धारित नॉर्म अनुसार वाहन उपलब्ध नहीं करवाते उन पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके अलावा विशेषकर तालाबों पर अवैध कब्जे हैं तो उन्हें खाली करवाया जाए और उन स्थानों पर बेहतर परियोजना विकसित करने के लिए सुझाव भेंजे जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यशपाल यादव, मॉनिटरिंग एवं कोर्डिनेशन सेल की विशेष सचिव डॉ. प्रियकां सोनी, मुख्यमंत्री के ओएसडी राकेश संधु, विवेक कालिया, मॉनिटरिंग एवं कोर्डिनेशन सेल के कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

 

कारोबारी सुगमता और औद्योगिक निवेश बढ़ाने को 28 सूत्री सुधार एजेंडा पर काम

कारोबारी नियमों के सरलीकरण और एमएसएमई इकोसिस्टम को मजबूत करने में जुटा हरियाणा
भवन निर्माण उप-नियमों को सरल बनाने और नियामकीय सुधारों में तेजी लाने पर केंद्र से मिली सराहना
चंडीगढ़, 9 अक्तूबर-हरियाणा सरकार प्रदेश को कारोबार और निवेश के लिए अधिक अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नियामकीय सुधारों के साथ-साथ सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था को उद्यमियों के अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए राज्य सरकार 28 सूत्री सुधार एजेंडा पर काम कर रही है।
यह जानकारी आज अनुपालन में कमी लाने और नियामकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण से जुड़े अभियान के दूसरे चरण के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए हुई उच्चस्तरीय बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक और हरियाणा के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने की।
बैठक के दौरान श्री के.के. पाठक ने भवन निर्माण उप-नयमों को सरल बनाने तथा नियामकीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के हरियाणा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण संबंधी नियमों को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और कारोबार के अनुकूल बनाने से अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को दूर करने, कारोबारी सुगमता में सुधार लाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से 28 सूत्रीय सुधार एजेंडा पर काम कर रही है। औद्योगिक विकास, भूमि संबंधी नियमों, भवन निर्माण की मंजूरी, श्रम सुधारों, बिजली कनेक्शन, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक-केंद्रित सेवाओं सहित विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
उन्होंने बताया कि अब तक आठ सुधार प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं, जबकि 18 प्रस्तावों पर सहमति बनने के बाद उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जटिल और अनुमति-आधारित नियामकीय व्यवस्था को सरल एवं पूर्वानुमेय प्रणाली में बदलना है, ताकि उद्यमी अधिक विश्वास के साथ अपने कारोबार में निवेश कर सकें, उसका विस्तार कर सकें और संचालन कर सकें।
उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण विधायी पहल के तहत राज्य विधानसभा द्वारा गत 01 सितंबर को हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 को पारित किया गया। यह पहल नए उद्यमों के लिए प्रक्रियागत औपचारिकताओं को कम करने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक सहयोगी वातावरण तैयार करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
निवेशकों की सुविधा के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक मॉडल टाउनशिप में खाली औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित शर्तों और शुल्क के अधीन पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को एचएसआईआईडीसी की पूर्व अनुमति के बिना अनुमत औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित परियोजनाओं में बदलाव करने की सुविधा दी गई है। ऐसे मामलों में संबंधित एस्टेट मैनेजर को केवल सूचना देना आवश्यक होगा और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
राज्य सरकार भूमि उपयोग की ऐसी आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जो मांग पर आधारित हो और जिसमें उन गतिविधियों की अनुमति देने का सिद्धांत अपनाया जाए, जिन पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध न हो। इस पहल का उद्देश्य आवश्यक नियोजन संबंधी सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए भूमि उपयोग में अधिक लचीलापन प्रदान करना है।
इसके साथ ही, भवन और निर्माण संबंधी अनुमतियों की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। साथ ही अग्नि सुरक्षा नियमों की समीक्षा भी की जा रही है। श्रम सुधारों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को चैबीसों घंटे संचालित करने की सुविधा प्रदान करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की हैं। इसके साथ ही, निर्धारित शर्तों के अधीन महिलाओं को रात्रि पाली में रोजगार देने से संबंधित प्रावधानों में भी संशोधन किए गए हैं। इन उपायों से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर बढ़ने और कारोबारियों को संचालन में अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है।
बैठक में मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्त प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पंचायती भूमि शुरू होगी प्राकृतिक खेती : श्याम सिंह राणा

प्रथम चरण में पट्टे पर दिया जाएगा पंचायती भूमि का 10 फ़ीसदी हिस्सा

चंडीगढ़, 9 अक्टूबर – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश सरकार पंचायती भूमि पर भी प्राकृतिक खेती शुरू करेगी। इसके लिए पंचायतों को अपनी भूमि पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रथम चरण में अगले वर्ष के प्रारम्भ में पंचायती भूमि के 10 फ़ीसदी हिस्से को प्राकृतिक खेती करने के लिए पट्टे पर दिया जाएगा।

श्री राणा अपने कार्यालय में “बजट-घोषणाओं” तथा “सीएम-घोषणाओं” से संबंधित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार भी उपस्थित थे।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने अधिकारियों को आम-बजट में की घोषणाओं को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की 800 एकड़ भूमि पर तो प्राकृतिक खेती की ही जाएगी, साथ ही साथ अब पंचायती भूमि पर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती से होने वाली उपज की बिक्री के लिए अनाज मंडियों में अलग व्यवस्था की जाएगी।

श्री श्याम सिंह राणा को अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष जहां एक लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि को ठीक किया था वहीं इस वर्ष एक लाख 40 हजार एकड़ भूमि को दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा है। इसमें से अभी तक लगभग 22 हजार एकड़ भूमि को ठीक कर दिया गया है। उन्होंने “मेरा पानी मेरी विरासत” योजना योजना के तहत धान की जगह अन्य फसलों की बुआई करने पर दिए जाने वाले अनुदान की भी समीक्षा की।

उन्होंने खेतों की मिट्टी के साथ-साथ ट्यूबवेल के पानी की जाँच में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को इस पानी की जांच करवाने के लिए किसानों को जागरूक करने तथा उनको प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। अब तक लगभग 3 हजार किसानों ने अपने ट्यूबवेल के पानी की जांच करवाई है।

श्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी “बजट-घोषणाओं” तथा “सीएम-घोषणाओं” को निर्धारित अवधि में पूरा किया जाना चाहिए।
क्रमांक -2026
जंगबीर सिंह

 

 

राज्य एनएसएस पुरस्कार 2025-26

31अक्टूबर तक भेजे जा सकेंगे नामांकन: मंत्री महीपाल ढांडा

चंडीगढ़, 9 अक्टूबर- हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समन्वयकों, अधिकारियों तथा स्वयंसेवकों को सम्मानित करने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा ‘राज्य एनएसएस पुरस्कार 2025-26’ प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए राज्य एनएसएस सेल द्वारा विश्वविद्यालय तथा जिला एवं पॉलिटेक्निक स्तरीय एनएसएस इकाइयों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 हेतु कुल 42 पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें विश्वविद्यालय एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक के लिए 1, जिला/पॉलिटेक्निक एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक के लिए 1, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी एवं इकाई के लिए 30 तथा एनएसएस स्वयंसेवकों के लिए 10 पुरस्कार शामिल हैं। समन्वयकों हेतु 3 वर्ष तथा कार्यक्रम अधिकारियों व स्वयंसेवकों हेतु 2 वर्षों की गतिविधियों और उपलब्धियों का सत्यापित रिकॉर्ड अनिवार्य होगा।

उन्होंने बताया कि केवल उचित माध्यम से भेजे गए नामांकन ही स्वीकार किए जाएंगे। सीधे भेजे गए, ई-मेल द्वारा प्रेषित या बिना दस्तावेजों वाले आवेदन रद्द कर दिए जाएंगे। इसके अलावा, केवल एनएसएस के बैनर तले आयोजित गतिविधियां ही मान्य होंगी।

उन्होंने बताया कि संबंधित समन्वयकों को  सत्यापित नामांकन पूर्ण प्रपत्रों के साथ 31 अक्टूबर, 2026 तक ‘स्टेट एन०एस०एस० सेल, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा सदन, सेक्टर-5, पंचकूला’ में जमा करवाने होंगे।
क्रमांक-2026

हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए संबल बनीं हरियाणा सरकार की ‘सखी – वन स्टॉप सेंटर’ योजना

सितंबर तक कुल 66,818 मामलों का निवारण

चंडीगढ़ , 9 अक्टूबर – हरियाणा में हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए ‘सखी – वन स्टॉप सेंटर’ योजना एक बड़ा संबल साबित हो रही है। “सशक्त महिला, सुरक्षित महिला” के संदेश के साथ कार्य कर रहे इन केंद्रों के माध्यम से शारीरिक, यौन, भावनात्मक, मानसिक या आर्थिक हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 22 वन स्टॉप सेंटर पूरी तरह से क्रियाशील हैं। इनमें से 10 सेंटर अपने स्वयं के भवनों से संचालित हो रहे हैं तथा 5 नए अतिरिक्त वन स्टॉप सेंटर भी स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से सितंबर 2026 तक कुल 66,818 मामलों का निवारण और सहायता प्रदान की जा चुकी है।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि इन केंद्रों पर पीड़ित महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता, मुकदमे के लिए कानूनी सहायता, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परामर्श, एफआईआर दर्ज करवाने व पुलिस सुरक्षा में सहायता तथा 20 दिनों तक का अल्पकालिक सुरक्षित अस्थायी आश्रय प्रदान किया जाता है। इस अस्थायी आश्रय में महिलाओं और उनके बच्चों (किसी भी उम्र की लड़कियां तथा 12 वर्ष तक के लड़के) के लिए बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। यदि किसी पीड़िता को 20 दिनों से अधिक समय के प्रवास या दीर्घकालिक पुनर्वास की आवश्यकता होती है, तो उन्हें नारी निकेतन (करनाल), महिला आश्रम (रोहतक) जैसे सरकारी संस्थानों या भाई कन्हैया लाल ट्रस्ट (सिरसा), आशियाना, करनाल द अर्थ सेवियर्स फाउंडेशन जैसी एनजीओ संस्थाओं में भेज दिया जाता है।

इसके अलावा गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में स्वास्थ्य विभाग और “जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम” के माध्यम से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, मानव तस्करी, ऑनर किलिंग, तेजाब हमला या किसी भी प्रकार की हिंसा से पीड़ित हर महिला इन केंद्रों से सहायता प्राप्त कर सकती है। बेहतर समन्वय के लिए इन सेंटरों को वूमेन हेल्पलाइन 181, इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से सीडीएसी के माध्यम से जोड़ा गया है। पीड़ित महिलाएं किसी भी समय आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री 181 या 112 पर संपर्क कर सकती हैं अथवा अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.wcdhry.gov.in पर जानकारी हासिल कर सकती हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने गुरुग्राम में 22 करोड़ की लागत के तीन विकास कार्यों का किया शिलान्यास

चंडीगढ़, 9 अक्टूबर – हरियाणा की स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान तथा आयुष मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि कि हम राजनीति अपने लिए नहीं, बल्कि जनता के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए करते हैं। हमारा उद्देश्य जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को सुनना, उनकी जरूरतों को समझना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम जनता और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु बनें, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों को अपने छोटे-बड़े कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्वास्थ्य मंत्री शुक्रवार को गुरुग्राम के वार्ड 15 में विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास करने उपरांत उपस्थित जन को संबोधित कर रही थी। कार्यक्रम में पटौदी की विधायक बिमला चौधरी और सोहना के विधायक तेजपाल तंवर भी मौजूद रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गुरुग्राम तेजी से विकसित हो रहा शहर है और भविष्य में इसकी आबादी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतें और बढ़ेंगी। ऐसे में हमारी प्राथमिकता है कि शहर के विस्तार और लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम नागरिक अस्पताल का ड्राइंग कार्य पूरा हो चुका है। जल्द ही सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत धरातल पर कार्य का शुभारम्भ किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लोगों की मांग के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार, चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समय पर सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जनता के लिए हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं और जनता का विश्वास, सहयोग तथा उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही हमारी प्राथमिकता है।

आरती सिंह राव ने इस अवसर पर नगर निगम गुरुग्राम के वार्ड 15 में 22 करोड़ रुपये की लागत के तीन विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया। इनमें सेक्टर-66 में सड़कों के निर्माण, फुटपाथ एवं साइकिल ट्रैक विकसित करने तथा सीवरेज पाइप लाइन बिछाने,  मैदावास गाँव में सम्राट मिहिर भोज चौक से गांव कादरपुर रोड (डीएलएफ 30एम रोड) तक सड़क का आरएमसी एम-40 द्वारा पुनर्वास, सीवरेज लाइन, बरसाती नाला एवं फुटपाथ के निर्माण कार्य तथा साउथ सिटी-2 में मौजूदा सड़कों का बीएम एवं बीसी तकनीक से पुनर्वास कार्य शामिल है। इन विकास परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ नागरिकों को सुगम आवागमन, बेहतर जल निकासी और आधुनिक शहरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

महिला सशक्तिकरण के लिए हरियाणा सरकार की बड़ी पहल

राज्य स्तरीय पुरस्कारों के लिए मांगे ऑनलाइन आवेदन

चंडीगढ़ 9 अक्टूबर – हरियाणा में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित व सम्मानित करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।इच्छुक पात्र आवेदक 5 नवंबर, 2026 तक वेबसाइट onlinemis.wcdhry.gov.in/gaurav के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले महत्वपूर्ण पुरस्कारों में 5 लाख रुपये की राशि,  प्रशस्ति पत्र और शॉल के साथ ‘श्रीमती सुषमा स्वराज पुरस्कार’, 1.50 लाख रुपये की राशि व प्रशस्ति पत्र के साथ ‘इंदिरा गांधी महिला शक्ति पुरस्कार’, 1 लाख रुपये की राशि एवं प्रशस्ति पत्र के साथ ‘कल्पना चावला शौर्य पुरस्कार’ तथा 1 लाख रुपये की राशि व प्रशस्ति पत्र के साथ ‘बहन शन्नो देवी पंचायती राज पुरस्कार’ शामिल हैं।

इसके अलावा सरकारी कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं महिला उद्यमी श्रेणियों में भी विजेताओं को 21 हजार रुपये की नकद राशि, प्रशस्ति पत्र और शॉल प्रदान किए जाएंगे।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि जिला स्तर पर प्राप्त सभी आवेदनों की जांच जिला स्तरीय अनुशंसा समिति द्वारा की जाएगी। समिति द्वारा अनुशंसित पात्र मामलों का आवश्यक सत्यापन व पुलिस वेरिफिकेशन कराने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर मामलों को मुख्यालय भेजा जाएगा।

आमजन से अपील की गई है कि वे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पात्र महिलाओं और संबंधित श्रेणियों के योग्य व्यक्तियों तक इस योजना की जानकारी पहुंचाएं तथा उन्हें समय-सीमा के भीतर आवेदन करने के लिए प्रेरित करें। साथ ही योजना से संबंधित किसी भी अन्य जानकारी के लिए संबंधित जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास विभाग) के कार्यालय से संपर्क कर किया जा सकता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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