April 5, 2026 7:50 pm

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सादगी की शान: कैथल के तंवर परिवार ने बिना दहेज रचाई मिसाल

 

दिखावे के दौर में रिश्तों की असली कीमत
कैथल। आज जब शादियां तड़क-भड़क, महंगे इंतज़ाम और स्टेटस के प्रदर्शन का माध्यम बनती जा रही हैं, ऐसे समय में कैथल के गांव क्योड़क का तंवर परिवार समाज के सामने सादगी, संवेदना और जिम्मेदारी की एक प्रेरक तस्वीर लेकर आया है। परिवार ने यह संदेश दिया कि विवाह दो परिवारों के बीच प्रेम और सम्मान का बंधन है—दिखावे का मंच नहीं।

बिना दहेज, बेहद सरल तरीके से संपन्न हुआ विवाह
पूर्व चेयरमैन जसबीर सिंह तंवर और पूर्व सरपंच रणबीर सिंह तंवर के परिवार में 11वें बेटे आर्यन तंवर की शादी पूरी तरह बिना दहेज और सादगी के साथ संपन्न हुई। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद परिवार ने परंपरागत दिखावे से दूरी रखी और समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया।

1 रुपया 90 पैसे का कार्ड, 1 रुपया शगुन
जिला पार्षद प्रतिनिधि विकास तंवर के चचेरे भाई आर्यन तंवर का विवाह सहारनपुर निवासी साक्षी के साथ हुआ।
शादी का निमंत्रण पत्र मात्र 1 रुपया 90 पैसे में छपवाया गया—जो फिजूलखर्ची के खिलाफ एक मजबूत प्रतीक बन गया। दहेज के नाम पर सिर्फ 1 रुपया शगुन लिया गया। बारात के स्वागत में भी किसी महंगे उपहार या दिखावे के बजाय केवल फूल भेंट किए गए। यह दृश्य सादगी की पराकाष्ठा और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण रहा।

190 एकड़ जमीन, फिर भी बिना आडंबर
तंवर परिवार के पास 190 एकड़ कृषि भूमि, अनाज मंडी में तीन आढ़त की दुकानें और एक राइस मिल है। आर्थिक संपन्नता के बावजूद शादी को सरल और मर्यादित रखा गया।
पूर्व चेयरमैन जसबीर तंवर का कहना है कि जिस पिता ने अपनी बेटी को 20–25 वर्षों तक पाल-पोसकर, पढ़ा-लिखाकर इस मुकाम तक पहुंचाया—उससे बड़ा दान कोई नहीं। ऐसे में दहेज मांगना न केवल अनुचित है, बल्कि बेटियों के सम्मान के भी खिलाफ है।

बहुओं में समानता और सम्मान का संदेश
परिवार का स्पष्ट मानना है कि जब बहू दहेज लेकर नहीं आती, तो घर में सभी बहुएं बराबरी के साथ सम्मान पाती हैं। इससे तुलना और भेदभाव की भावना स्वतः समाप्त हो जाती है।
तंवर परिवार दुल्हन के लिए आवश्यक घरेलू सामान पहले से स्वयं खरीदकर उसके कमरे में सजा देता है, ताकि उसे किसी तरह की कमी महसूस न हो। यह पहल बताती है कि सम्मान धन से नहीं, संस्कारों और सोच से मिलता है।

दहेज प्रथा पर करारा प्रहार
ऑस्ट्रेलिया में 14 वर्ष रह चुके विकास तंवर ने दहेज प्रथा को समाज पर कलंक बताया। उनका कहना है कि जैसे सती प्रथा इतिहास में एक अभिशाप थी, वैसे ही दहेज प्रथा भी आज की बड़ी सामाजिक बुराई है।
उन्होंने कहा कि यदि देश को आगे बढ़ाना है और विश्वगुरु बनाना है, तो ऐसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करना होगा। तंवर परिवार की यह पहल न केवल दहेज लोभियों के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज के लिए यह संदेश भी कि बदलाव की शुरुआत अपने घर से होती है।

समाज के लिए प्रेरणा
तंवर परिवार की यह शादी साबित करती है कि परंपराओं को निभाते हुए भी सादगी अपनाई जा सकती है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को दहेजमुक्त समाज की ओर प्रेरित करने वाली है—जहां रिश्तों की नींव सम्मान, प्रेम और बराबरी पर टिकी हो।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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