September 14, 2026 9:15 am

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HARYANA: 590 करोड़ IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: CBI ने दर्ज की FIR, जांच ने पकड़ी रफ्तार

बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के खातों से फर्जी ट्रांजेक्शन के जरिए रकम गायब; बैंक कर्मियों, निजी कंपनियों और बिचौलियों की मिलीभगत उजागर होने के संकेत
चंडीगढ़/नई दिल्ली, 9 अप्रैल 2026:
हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में अब बड़ा मोड़ आ गया है। मामले की जांच अब पूरी तरह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में पहुंच गई है। CBI ने इस संबंध में दिल्ली में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसके बाद एजेंसी ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
हरियाणा सरकार पहले ही इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपने की सिफारिश कर चुकी थी। अब एफआईआर दर्ज होने के साथ ही मामले में बड़े खुलासों की उम्मीद और बढ़ गई है।
घोटाले का पूरा तंत्र: कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
प्रारंभिक जांच के अनुसार यह घोटाला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के उन खातों से जुड़ा है, जो IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में संचालित हो रहे थे।
आरोप है कि:
सरकारी खातों में जमा करोड़ों रुपये को फर्जी तरीके से ट्रांसफर किया गया
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को बिना अनुमति तोड़ा गया
बैंकिंग सिस्टम में अनधिकृत एंट्री और हेरफेर कर रकम बाहर निकाली गई
ट्रांजेक्शन को छिपाने के लिए कई लेयर में पैसे घुमाए गए
इस पूरे खेल में बैंक के अंदरूनी कर्मचारियों और बाहरी नेटवर्क के बीच सुनियोजित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
मनी ट्रेल में चौंकाने वाले खुलासे
जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि घोटाले की रकम को सीधे इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि उसे छिपाने के लिए जटिल नेटवर्क बनाया गया।
रकम को पहले शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया
इसके बाद इसे ज्वेलरी और सोने की खरीद में लगाया गया
कई हिस्सों को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया
बड़ी मात्रा में कैश निकासी भी की गई
सूत्रों के अनुसार, ट्राइसिटी (चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला) के कुछ कारोबारी और बिचौलिए भी जांच के दायरे में हैं।
अब तक की कार्रवाई
हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सबसे पहले मामला दर्ज किया था
कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है
गिरफ्तार लोगों में
बैंक के पूर्व कर्मचारी
निजी कंपनियों से जुड़े व्यक्ति
शामिल हैं
CBI ने अब रेगुलर केस (RC) दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है
बैंक और सरकार की प्रतिक्रिया
हरियाणा सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए केंद्रीय जांच की मांग की थी
IDFC फर्स्ट बैंक की ओर से दावा किया गया है कि प्रभावित सरकारी विभागों को करीब 583 करोड़ रुपये (मूलधन और ब्याज सहित) वापस किए जा चुके हैं
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घोटाले ने सरकारी वित्तीय प्रबंधन और बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
सरकारी खातों की सुरक्षा व्यवस्था में खामियां
बैंकिंग ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम की कमजोरी
निजी बैंकों में सरकारी फंड रखने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार अब वित्तीय लेन-देन के लिए कड़े प्रोटोकॉल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने पर विचार कर रही है।
आगे क्या होगा
CBI की एंट्री के बाद जांच और व्यापक हो गई है। आने वाले दिनों में:
बड़े स्तर पर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा
मनी ट्रेल को देशभर में ट्रैक किया जाएगा
और गिरफ्तारियां संभव हैं
घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश तेज होगी
निष्कर्ष:
590 करोड़ का यह घोटाला हरियाणा के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड में से एक माना जा रहा है। CBI जांच शुरू होने के बाद अब उम्मीद है कि इस मामले में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लगाने के लिए मजबूत सिस्टम तैयार किया जाएगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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