नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह मामला भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष हुई। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर जमानत देने का आधार नहीं बनता, लेकिन यदि दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है तो याचिकाकर्ता दोबारा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि आरोपी छह महीने से अधिक समय से हिरासत में है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला न तो ट्रैप का है और न ही आरोपी के फरार होने का कोई खतरा है।
अदालत को बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप-पत्र व पूरक आरोप-पत्र दोनों दाखिल किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि ट्रायल के दौरान कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं, इसलिए फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इससे पहले फरवरी में भुल्लर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वहीं चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने भी 2 जनवरी 2026 को उनकी जमानत याचिका नामंजूर की थी।
भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को मोहाली स्थित कार्यालय से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिचौलियों के माध्यम से रिश्वत ली।












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