बाबूगिरी ब्यूरो
फोंडा, गोवा। भक्ति, संगीत और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम हाल ही में गोवा के फोंडा तालुका में देखने को मिला, जब प्रसिद्ध गोमांतकीय गायिका डॉ. शकुंतला भरणे की मधुर आवाज़ में सजे दो भक्ति गीतों—“नाम ही जप तू” और “तू देवी महामाया”—का भव्य देवार्पण महालक्ष्मी मंदिर के पावन सभागार में किया गया। इस अवसर ने न केवल संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और आध्यात्मिकता की गहरी अनुभूति भी जगाई।
इन दोनों भक्ति गीतों को प्रसिद्ध निर्देशक करण समर्थ ने बेहद कलात्मक और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया है। हॉलीवुड फिल्मों के अनुभव से समृद्ध करण समर्थ ने इस एल्बम में भारतीय सनातन परंपरा, मंदिर संस्कृति और भक्ति भाव को आधुनिक सिनेमाई दृष्टि से जोड़ने का सफल प्रयास किया है। यही कारण है कि यह एल्बम केवल संगीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बनकर सामने आया है।
इन गीतों की शूटिंग गोवा के फोंडा तालुका स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र श्री महालक्ष्मी संस्थान, बांदीवडे और श्री नवदुर्गा देवस्थान, कुंडई जैसे पवित्र और ऐतिहासिक मंदिरों में की गई। इन धार्मिक स्थलों की दिव्यता, पारंपरिक वास्तुकला और शांत वातावरण ने गीतों को और अधिक भक्तिमय बना दिया। हर दृश्य में मंदिरों की आध्यात्मिक ऊर्जा स्पष्ट रूप से महसूस होती है, जिससे दर्शक स्वयं को भक्ति के वातावरण में डूबा हुआ पाते हैं।
पहला गीत
“नाम ही जप तू” प्रसिद्ध गीतकार माणिक राव गवणेकर द्वारा लिखा गया है। इस गीत की सबसे खास बात यह है कि इसका संगीत स्वयं डॉ. शकुंतला भरणे ने तैयार किया है। गीत के बोल अत्यंत सरल, सहज और गहरे आध्यात्मिक भाव से भरपूर हैं। यह गीत नामस्मरण की महिमा को दर्शाता है और श्रोता को ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देता है। डॉ. भरणे की मधुर आवाज़ और शास्त्रीय संगीत की गहराई इस गीत को विशेष बनाती है।
दूसरा गीत
“तू देवी महामाया” प्रसिद्ध गीतकार माधव बोरकर की रचना है। इस गीत को भारतीय सिनेमा जगत के प्रतिष्ठित संगीतकार दत्ता दावजेकर ने संगीतबद्ध किया है। देवी शक्ति, मातृत्व और आध्यात्मिक ऊर्जा को समर्पित यह गीत अपने शब्दों और संगीत की भव्यता के कारण विशेष प्रभाव छोड़ता है। इस गीत में भक्ति की शक्ति और देवी के प्रति अटूट श्रद्धा का सुंदर चित्रण किया गया है।
डॉ. शकुंतला भरणे की गायकी इन दोनों गीतों की आत्मा है। शास्त्रीय संगीत में उनकी गहरी पकड़, सुरों की मिठास और भावपूर्ण अभिव्यक्ति इन गीतों को केवल सुनने योग्य नहीं, बल्कि महसूस करने योग्य बनाती है। उनकी आवाज़ में भक्ति का ऐसा समर्पण झलकता है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करता है। यही कारण है कि इन गीतों को रिलीज़ होते ही श्रोताओं और भक्तों से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
इन दोनों गीतों का देवार्पण हाल ही में बंदोडा स्थित महालक्ष्मी मंदिर के सभागार में एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन के दौरान किया गया। यह कार्यक्रम माणिक गवणेकर द्वारा महाभारत के कोंकणी अनुवाद की पुस्तक के विमोचन समारोह का भी हिस्सा था। इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त, साहित्य प्रेमी, संगीत प्रेमी और कला जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने इन गीतों की जमकर सराहना की। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि आज के दौर में जब संगीत का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे भक्ति गीत समाज को अपनी जड़ों, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। इन गीतों में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश छिपा है।
मशहूर कैमरामैन सैंडी सरदेसाई ने इन गीतों को अत्यंत सुंदर और सिनेमाई अंदाज़ में फिल्माया है। हर फ्रेम में मंदिरों की भव्यता, दीपों की रोशनी, पूजा-अर्चना की पवित्रता और कलाकारों की भावनात्मक अभिव्यक्ति स्पष्ट दिखाई देती है। यही दृश्यात्मक सौंदर्य इन गीतों को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
निर्देशक करण समर्थ इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके क्योंकि वे दिल्ली में अपनी दूसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे, लेकिन उनकी रचनात्मक उपस्थिति पूरे एल्बम में स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि हॉलीवुड की तकनीकी समझ और भारतीय सनातन संस्कृति का मेल एक अद्भुत कलात्मक अनुभव दे सकता है।
यह एल्बम केवल दो गीतों का संग्रह नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा है। इसमें संगीत साधना बन जाता है, स्वर प्रार्थना बन जाते हैं और कैमरा भक्ति का माध्यम बन जाता है। “नाम ही जप तू” और “तू देवी महामाया” जैसे गीत यह याद दिलाते हैं कि जब कला और आस्था एक साथ आती हैं, तब संगीत केवल मनोरंजन नहीं रहता—वह साधना बन जाता है।
डॉ. शकुंतला भरणे, करण समर्थ, माणिक राव गवणेकर, माधव बोरकर, दत्ता दावजेकर और सैंडी सरदेसाई जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों की यह सामूहिक प्रस्तुति निश्चित रूप से भक्ति संगीत के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगी। यह एल्बम आने वाले समय में भक्ति संगीत प्रेमियों के लिए एक विशेष स्थान रखेगा और सनातन संस्कृति की सुगंध को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।











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