₹12.05 लाख की ठगी का मामला सुलझाया
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 20 अप्रैल: चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने फर्जी Blue Dart हेल्पलाइन नंबर के जरिए मोबाइल हैक कर साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों ने गूगल सर्च पर फर्जी Blue Dart कस्टमर केयर नंबर डालकर लोगों को जाल में फंसाया और APK फाइल डाउनलोड करवाकर मोबाइल फोन से बैंक खातों की जानकारी हासिल कर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
यह कार्रवाई एसपी साइबर यूटी चंडीगढ़ आईपीएस गीतांजलि खंडेलवाल के निर्देश, डीएसपी साइबर क्राइम एवं आईटी के मार्गदर्शन तथा सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाना प्रभारी की निगरानी में की गई। इस संबंध में थाना साइबर क्राइम, चंडीगढ़ में FIR नंबर 42 दिनांक 14 मार्च 2026 को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
नवाज वारसी, पुत्र निजामुद्दीन मियां, निवासी शकरपुर, दिल्ली, मूल निवासी देवघर, झारखंड, उम्र 26 वर्ष
दिलकश अंसारी उर्फ आदिल, पुत्र सिराज अंसारी, निवासी लखनपुर, देवघर, झारखंड, उम्र 27 वर्ष
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह ऑनलाइन Blue Dart कूरियर बुक करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान गूगल पर मिले एक नंबर पर संपर्क किया गया, जहां से ठगों ने उन्हें ₹10 का भुगतान करने के लिए कहा।
जैसे ही उन्होंने भुगतान किया, उनके मोबाइल फोन में समझौता (मोबाइल कम्प्रोमाइज) हो गया और उनके SBI बैंक खाते से अलग-अलग खातों में कुल ₹12,05,000 की अनधिकृत ट्रांजैक्शन कर ली गई।
दिल्ली-एनसीआर में छापेमारी
जांच के दौरान तकनीकी निगरानी और फील्ड वर्क के आधार पर पुलिस को पता चला कि यह गिरोह दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों—शाहदरा, लक्ष्मी नगर और बुलंदशहर—से ऑपरेट कर रहा था।
14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में छापेमारी के दौरान नवाज वारसी को शकरपुर, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। साथ ही एक सिम कार्ड भी जब्त किया गया, जो फर्जी पहचान के आधार पर “Blue Dart Courier Service” के नाम से रजिस्टर्ड था।
पूछताछ में नवाज ने अपने साथी दिलकश अंसारी उर्फ आदिल के साथ मिलकर साइबर ठगी करने की बात कबूल की। उसने बताया कि वह लोगों को फोन कर भरोसा जीतता था, जबकि तकनीकी व्यवस्था और कॉल रूटिंग का काम आदिल द्वारा उपलब्ध कराए गए सिम कार्डों के जरिए होता था।
इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को फरीदाबाद, हरियाणा में छापेमारी कर दिलकश अंसारी को गिरफ्तार किया गया। उसने पूछताछ में फर्जी पहचान के आधार पर सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की।
दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और अब पुलिस इनके अन्य साथियों तथा पूरे वित्तीय और तकनीकी नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस की जनता से अपील
चंडीगढ़ पुलिस ने लोगों से अपील की है कि—
कूरियर, बैंक या अन्य सेवाओं के कस्टमर केयर नंबर केवल आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप से ही लें
गूगल सर्च पर मिले अनजान नंबरों पर भरोसा न करें
OTP, बैंक डिटेल, पासवर्ड या निजी जानकारी किसी से साझा न करें
अनजान लिंक, WhatsApp, SMS या ईमेल से APK फाइल डाउनलोड न करें
छोटी रकम के भुगतान के नाम पर होने वाली ठगी से सतर्क रहें
कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत संपर्क बंद करें
साइबर ठगी की शिकायत तुरंत cybercrime.gov.in या नजदीकी पुलिस स्टेशन में दें
संदिग्ध कॉल की पुष्टि के लिए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें
पुलिस ने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।












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