August 29, 2026 1:21 pm

August 29, 2026 1:21 pm

CHANDIGARH: अफ़सरशाही की सुस्ती ने रोका चंडीगढ़ यूटी का विकास का पहिया

करोड़ों का बजट होते हुए भी ज़मीन पर नहीं उतरे काम, प्रशासन पूरी तरह ‘फेल’ : राजबीर सिंह भारतीय

चंडीगढ़: चंडीगढ़ के विकास पर अफ़सरशाही की सुस्ती भारी पड़ती नज़र आ रही है। शहर के जाने-माने समाजसेवी एवं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (एडवोकेट जनरल कार्यालय) के सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडेंट राजबीर सिंह भारतीय ने चंडीगढ़ प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि फाइलों को लटकाने और निर्णय टालने की प्रशासनिक प्रवृत्ति ने शहर के विकास पर ‘ग्रहण’ लगा दिया है।
राजबीर सिंह भारतीय के अनुसार, करोड़ों रुपये का बजट उपलब्ध होने के बावजूद विकास कार्य ज़मीन पर नहीं उतर पा रहे हैं, जो सीधे तौर पर शहरवासियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

बजट लैप्स होने का खतरा, केंद्र लगा सकता है भारी कटौती
राजबीर सिंह भारतीय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार से चंडीगढ़ को लगभग ₹6,983.18 करोड़ का बजट मिला था, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अब भी विभागीय फाइलों में ही अटका हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों के अनुसार यदि आवंटित बजट समय पर खर्च नहीं होता, तो केंद्र सरकार अगले वित्तीय वर्ष में बजट में कटौती कर देती है।
उन्होंने कहा, “प्रशासन ने 2026-27 के लिए ₹1,396.63 करोड़ अतिरिक्त बजट की मांग कर कुल मांग ₹8,379.81 करोड़ तक पहुँचा दी है, लेकिन खर्च करने की इच्छाशक्ति नजर नहीं आ रही। यदि बजट में कटौती हुई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी चंडीगढ़ प्रशासन की होगी।”

प्रमुख विभागों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
राजबीर सिंह भारतीय ने नगर निगम, स्मार्ट सिटी एवं इंजीनियरिंग विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि नगर निगम में वार्डों के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं के लिए आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा।

स्मार्ट सिटी और इंजीनियरिंग विभाग की धीमी कार्यप्रणाली के चलते सड़कों की हालत खराब है और परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रहीं।
वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में अस्पतालों और स्कूलों के सुधार के लिए मिले फंड का उपयोग न होना जनता के स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य से समझौता है।

टैक्स हमारा, सुविधाएं अफ़सरों की मर्जी पर?”
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि अधिकारी फाइलें इधर-उधर घुमाने और फैसले टालने में व्यस्त हैं, जबकि आम जनता टूटी सड़कों, खराब स्वास्थ्य सेवाओं और बदहाल शिक्षा व्यवस्था से जूझ रही है।
टेंडर प्रक्रिया में देरी और विभागों के बीच आपसी खींचतान ने चंडीगढ़ के विकास को ठप कर दिया है।

प्रशासन से की सख्त मांगें
राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन से मांग की कि—
जिन विभागों और अधिकारियों ने बजट खर्च नहीं किया, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए।
बजट लैप्स होने की स्थिति में दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाए।
विकास कार्यों की निगरानी के लिए एक हाई-पावर कमेटी गठित की जाए, जो फाइलों के निपटारे की समय-सीमा तय करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो चंडीगढ़ का विकास और शहरवासियों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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