चंडीगढ़, 5 फरवरी 2026: हरियाणा रेवेन्यू ऑफिसर्स एसोसिएशन (HROA) ने हाल के दिनों में रेवेन्यू अधिकारियों की कथित अवैध गिरफ्तारी और निलंबन को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और वित्त आयुक्त (राजस्व) को ज्ञापन सौंपते हुए इसे कानून के प्रावधानों का खुला उल्लंघन बताया है।
ज्ञापन में एसोसिएशन ने श्री विक्रम सिंगला, तहसीलदार, रायपुर रानी और नरेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार, वजीराबाद की गिरफ्तारी/निलंबन का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस विभाग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति लिए बिना कार्रवाई की, जो कि वैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन है।
रजिस्ट्रेशन एक्ट और NOC को लेकर आपत्ति
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रिंग अथॉरिटीज़ को केवल उन्हीं मामलों में NOC मांगनी होती है, जो Haryana Development and Regulation of Urban Areas Act की धारा 7A के अंतर्गत आते हैं, न कि धारा 7(1) के तहत। रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत सद्भावना में किए गए कार्यों पर अधिकारियों को वैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को डराने–धमकाने और आपराधिक मामलों में घसीटने से पूरे राज्य में भय का माहौल बनने की बात कही गई है।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
एसोसिएशन ने सरकार से निम्न मांगें रखी हैं—
संबंधित अधिकारियों की गिरफ्तारी की तत्काल समीक्षा कर निलंबन आदेश रद्द किए जाएं।
डीजीपी हरियाणा द्वारा 23.12.2025 को जारी निर्देशों की कानूनी समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जाए, जिनके तहत JSR/SR के खिलाफ पीसी एक्ट में मामले दर्ज करने की बात कही गई है।
जहां कानून में सिविल प्रक्रिया उपलब्ध है, वहां मामलों को आपराधिक न बनाया जाए (जैसे स्टांप एक्ट की धारा 47A, बंटवारा, म्यूटेशन आदि)।
डीटीपी से जुड़े सभी पत्र डीटीसीपी के माध्यम से FCR को भेजे जाएं, रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को सीधे पत्र न भेजे जाएं।
फील्ड की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाए, जिसमें DRO, तहसीलदार और नायब तहसीलदार शामिल हों।
हड़ताल का ऐलान
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो तत्काल प्रभाव से सभी राजस्व कार्यों से संबंधित हड़ताल की जाएगी। एसोसिएशन ने सरकार से समय रहते हस्तक्षेप कर कानून का राज कायम रखने और ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि हड़ताल की स्थिति में राज्यभर में रजिस्ट्रेशन और राजस्व से जुड़े कामकाज पर असर पड़ सकता है।












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