बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 10 अप्रैल: हरियाणा में राजस्व प्रशासन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अगले महीने स्वचालित राजस्व प्रशासन प्रणाली की शुरुआत करेंगे। यह नई व्यवस्था कागजरहित और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देगी।
इस महत्वाकांक्षी पहल की समीक्षा शुक्रवार को वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंडलायुक्तों और उपायुक्तों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में की। बैठक में राजस्व प्रणाली में तेजी, पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि करीब 1,900 नव-प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष पटवारियों की जल्द तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि ये डिजिटल रूप से सक्षम पटवारी नई प्रणाली की रीढ़ बनेंगे और जमीनी स्तर पर कार्यक्षमता को मजबूत करेंगे।
उन्होंने उपायुक्तों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत निपटाया जाए और पांच दिन से अधिक की देरी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं होगी।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होगा भूमि प्रबंधन
फील्ड स्तर पर नियुक्त किए जाने वाले ये पटवारी भूमि रिकॉर्ड को आधार से जोड़ने, लाल डोरा नक्शों के अपडेट, रोवर तकनीक से सटीक सीमांकन, एग्रीस्टैक के तहत डेटा सत्यापन और कब्जे से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान जैसे कार्य करेंगे। इससे कार्यभार कम होगा और सिस्टम अधिक प्रभावी बनेगा।
ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली लागू करने की तैयारी
डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों को लगभग शून्य तक लाया जाए, ताकि ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली को पूरी तरह लागू किया जा सके। जिलों को प्रवेश और स्वीकृति दोनों स्तरों पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल गवर्नेंस में दिखी प्रगति
राज्य में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली के तहत अब तक 3.23 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग 84 प्रतिशत को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं, 85 प्रतिशत से अधिक गांवों के जियो-रेफरेंस्ड डेटा भू-नक्शा पोर्टल पर उपलब्ध हो चुके हैं।
कृषि क्षेत्र में भी डिजिटलीकरण तेजी से बढ़ रहा है। एग्रीस्टैक के तहत किसान पंजीकरण जारी है और डिजिटल फसल सर्वेक्षण 54 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इसके अलावा जमाबंदी अपडेट का कार्य भी 86 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी सभी सेवाएं
नई स्वचालित प्रणाली के तहत इंतकाल, रजिस्ट्रेशन और रिकॉर्ड प्रबंधन को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। नागरिक अब ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे, रिकॉर्ड देख सकेंगे और तेजी से स्वीकृति प्राप्त कर पाएंगे, जिससे सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम होंगे।
युवा आपदा मित्र योजना पर भी जोर
बैठक में ‘युवा आपदा मित्र योजना’ की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस योजना के तहत 5,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है और उन्हें इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट व बीमा सुविधा प्रदान की जा रही है। सोनीपत और कुरुक्षेत्र में प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में विस्तार जारी है।











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