चंडीगढ़, 26 मार्च 2026: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह आदेश न केवल सेवा नियमों के खिलाफ था, बल्कि इसे जारी करने वाला अधिकारी भी अधिकृत नहीं था।
यह फैसला जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार ने महेंद्र सिंह बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले (CWP-18055-2022) में सुनाया। याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह को जून 2020 में फरीदाबाद नगर निगम में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में 10 अगस्त 2022 को उन्हें पानीपत नगर निगम में ट्रांसफर कर बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पद पर तैनात कर दिया गया।
क्या था विवाद
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि बिल्डिंग इंस्पेक्टर का पद जूनियर इंजीनियर (सिविल) के अंतर्गत आता है, जिसके लिए सिविल इंजीनियरिंग की विशेष योग्यता जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैकेनिकल इंजीनियर होने के कारण उनके पास भवन निर्माण और निरीक्षण से जुड़े कार्यों की तकनीकी योग्यता नहीं है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि:
जूनियर इंजीनियर (सिविल), मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल अलग-अलग कैटेगरी के पद हैं
इन पदों के लिए योग्यता और प्रमोशन का ढांचा भी अलग-अलग है
किसी मैकेनिकल इंजीनियर को सिविल कार्यों से जुड़े पद पर तैनात नहीं किया जा सकता
अदालत ने यह भी माना कि संबंधित ट्रांसफर आदेश 1998 के सेवा नियमों के तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था, जो इसे अवैध बनाता है।
जनहित का भी दिया हवाला
कोर्ट ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञता के बिना किसी इंजीनियर को दूसरे क्षेत्र के काम में लगाना जनहित के खिलाफ हो सकता है, क्योंकि इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अंतिम फैसला
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 10 अगस्त 2022 का ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने संबंधित विभाग को यह छूट दी कि वह नियमों के अनुसार नया ट्रांसफर आदेश जारी कर सकता है, लेकिन केवल जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के पद पर और वैध कारणों के साथ।
क्यों है यह फैसला अहम
यह फैसला साफ करता है कि प्रशासनिक ट्रांसफर मनमाने तरीके से नहीं किए जा सकते। सभी नियुक्तियां और तबादले निर्धारित सेवा नियमों और योग्यताओं के अनुसार ही होने चाहिए।











Total Users : 291947
Total views : 494479