— डॉ. सुमिता मिश्रा ने जारी किए सख्त निर्देश, 5 अप्रैल तक रिपोर्ट तलब
चंडीगढ़, 2 अप्रैल। हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य भर के सभी सरकारी मेडिकल संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी के टैंकों की तत्काल जांच और सफाई के आदेश जारी किए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस मामले में “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि कई स्थानों पर पानी के टैंकों की नियमित सफाई न होने के मामले सामने आए हैं, जिससे मरीजों, कर्मचारियों और आगंतुकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संस्थान तुरंत प्रभाव से अपने यहां बने जमीन के ऊपर और नीचे दोनों प्रकार के टैंकों की विस्तृत जांच करें।
जांच के दौरान टैंकों में किसी भी प्रकार के प्रदूषण, रिसाव या संरचनात्मक नुकसान की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सके।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी पानी के टैंकों की पूरी तरह सफाई करना अनिवार्य होगा। इसमें टैंकों में जमा गाद हटाना, अंदरूनी सतहों की सफाई करना और निर्धारित मानकों के तहत उनका कीटाणु-नाशक उपचार (डिसइन्फेक्शन) करना शामिल है। साथ ही यह प्रक्रिया केवल अनुमोदित तरीकों से ही करने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. मिश्रा ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए सभी संस्थानों को टैंकों की सफाई और जांच का एक नियमित कार्यक्रम तैयार करना होगा, जिसे हर तीन महीने में लागू करना अनिवार्य होगा।
सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। वहीं, उपायुक्तों को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने दोहराया कि स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं का एक बुनियादी हिस्सा है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।










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