August 28, 2026 1:34 am

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पंचकूला नगर निगम में 160 करोड़ का एफडी घोटाला: कोटक महिंद्रा बैंक के वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र ने किया आत्मसमर्पण, जांच तेज

पंचकूला, 8 अप्रैल 2026: हरियाणा के पंचकूला में सामने आए करीब 160 करोड़ रुपये के एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कोटक महिंद्रा बैंक के वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इस कदम के बाद मामले की जांच ने नया मोड़ ले लिया है और पूरे घोटाले के नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला पंचकूला नगर निगम की एफडी में जमा करीब 160 करोड़ रुपये के कथित गबन से जुड़ा है। आरोप है कि इस राशि को योजनाबद्ध तरीके से फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे खेल में बैंकिंग सिस्टम और नगर निगम के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। आरोप है कि पुष्पेंद्र ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर नगर निगम की एफडी को तोड़कर रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाया और फिर उसे ऊंचे ब्याज पर बाजार में घुमा दिया।

ऊंचे ब्याज पर रकम बांटने का आरोप
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के जरिए निकाली गई रकम को बिल्डरों और अन्य व्यक्तियों को 3 से 5 प्रतिशत ब्याज पर उधार दिया गया। यह एक तरह का समानांतर फाइनेंशियल नेटवर्क तैयार करने जैसा था।
सूत्रों के मुताबिक, समय पर पैसा वापस न करने वालों पर दबाव बनाने के लिए कथित तौर पर पुलिस का नाम लेकर डराया भी जाता था, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

ऐसे खुला घोटाले का जाल
एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच के दौरान इस घोटाले की परतें एक-एक कर खुलती गईं। अब तक कई अहम गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:
कोटक महिंद्रा बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव
रजत धारा, जिसके खाते में करीब 70 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए
नगर निगम पंचकूला के पूर्व सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक
राजपुरा से एक अन्य आरोपी, जिसके खाते में करीब 3 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया
इन गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसी को पूरे नेटवर्क की गहराई का अंदाजा हुआ।
स्वाति तोमर कनेक्शन
इस मामले में एक चौंकाने वाला पहलू स्वाति तोमर के रूप में सामने आया है, जो पेशे से बायोलॉजी की शिक्षिका हैं। उन्होंने दो दिन पहले आत्मसमर्पण किया था।
जांच के मुताबिक, वर्ष 2020 में रजत धारा और पुष्पेंद्र ने उन्हें झांसे में लेकर उनके दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए। इन खातों में करीब 35 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि घोटाले में आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग भी किया गया।

पुष्पेंद्र से पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े राज
पुष्पेंद्र के आत्मसमर्पण के बाद अब ACB की जांच का फोकस उससे पूछताछ पर है। माना जा रहा है कि उसके पास इस पूरे नेटवर्क की अहम जानकारी है, जिससे घोटाले में शामिल अन्य बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि:
एफडी को तोड़ने की प्रक्रिया कैसे की गई
किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है
पैसा किन-किन चैनलों के जरिए घुमाया गया
क्या इस नेटवर्क का विस्तार अन्य शहरों तक भी है
सबसे बड़े घोटालों में शामिल
यह मामला पंचकूला के अब तक के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में गिना जा रहा है। इसमें न केवल बड़ी रकम का गबन हुआ है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
आगे क्या?
एंटी करप्शन ब्यूरो अब इस मामले में और गिरफ्तारियों की तैयारी में है। संभावना है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पंचकूला नगर निगम और बैंकिंग सेक्टर की साख पर लगे इस दाग को लेकर प्रशासन पर भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
(यह मामला अभी जांच के अधीन है, आगे और खुलासों की संभावना बनी हुई है।)

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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