चंडीगढ़, 9 अप्रैल। शहर में हाल ही में एक मकान तोड़ने की कार्रवाई को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ नागरिक आर.के. गर्ग ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
आर.के. गर्ग ने कहा कि जिस अधिकारी ने घर तोड़ने का आदेश दिया, वह नगर निगम (MC) का स्पेशल कमिश्नर है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई या विरोध देखने को नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिम्मेदार अधिकारी मौजूद था, तो काउंसलरों ने उसके खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सेक्टर-45 में धरना देना केवल “राजनीतिक दिखावा” बनकर रह गया है। गर्ग के अनुसार, अगर जनप्रतिनिधि वास्तव में लोगों के हित में काम कर रहे होते, तो विरोध सीधे उस अधिकारी के खिलाफ होता, न कि केवल मौके पर पहुंचकर सहानुभूति जताने तक सीमित रहता।
गर्ग ने कहा कि यह घटना केवल एक मकान तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और नीयत पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजकल धरना और विरोध प्रदर्शन “फोटो-ऑप” बनते जा रहे हैं, जबकि असली जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से आम जनता का सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो रहा है। “जब कार्रवाई एकतरफा लगे, विरोध दिखावटी हो और जवाबदेही न हो, तो लोगों का विश्वास टूटना स्वाभाविक है,” उन्होंने कहा।
अंत में गर्ग ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि क्या व्यवस्था वास्तव में जनता के हित में काम कर रही है या फिर यह सब केवल चुनावी राजनीति का हिस्सा बनकर रह गया है।
इस मामले में प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।












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