April 18, 2026 12:18 pm

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HARYANA: कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की रेगुलराइजेशन पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 2014 के 2 नोटिफिकेशन वैध, 2 रद्द;

हरियाणा के हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के अनुबंधित (Contractual), एडहॉक (Adhoc) और दैनिक वेतनभोगी (Daily Wage) कर्मचारियों की नियमितीकरण (Regularization) नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2014 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा जारी चार नोटिफिकेशनों में से दो को वैध ठहराया है, जबकि दो को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है।
इस फैसले का सीधा असर राज्य के हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो वर्षों से सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और संस्थानों में अनुबंध या दैनिक वेतन पर कार्यरत हैं और नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि रेगुलराइजेशन नियमित भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत सभी नागरिकों को समान अवसर मिलना चाहिए और बिना पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के किसी को स्थायी नियुक्ति देना उचित नहीं माना जा सकता।

2014 में जारी हुए थे 4 नोटिफिकेशन
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2014 में ग्रुप-बी, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए चार अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए थे। इनका उद्देश्य लंबे समय से कार्यरत अनुबंधित, एडहॉक और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करना था।
इन नोटिफिकेशनों को कई पक्षों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने सभी चारों नोटिफिकेशन रद्द कर दिए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब अंतिम फैसला सुनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने किन दो नोटिफिकेशनों को वैध माना
16 जून और 18 जून 2014 के नोटिफिकेशन को मिली मंजूरी
सुप्रीम Court ने 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को जारी दो नोटिफिकेशनों को वैध माना है। कोर्ट ने कहा कि ये नोटिफिकेशन उन कर्मचारियों को राहत देने के लिए थे, जो 1996 की पुरानी रेगुलराइजेशन पॉलिसी का लाभ नहीं ले पाए थे।
इन कर्मचारियों ने लंबे समय तक सेवा दी थी, लेकिन तकनीकी कारणों या प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते वे नियमित नहीं हो सके थे। ऐसे मामलों में सरकार द्वारा राहत देना न्यायसंगत माना गया।
इस फैसले के बाद ऐसे पात्र कर्मचारियों को नियमित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

7 जुलाई 2014 के नोटिफिकेशन को कोर्ट ने बताया अवैध
बिना विज्ञापन और इंटरव्यू के नियमितीकरण पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 7 जुलाई 2014 को जारी दो नोटिफिकेशनों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया। इन नोटिफिकेशनों में एडहॉक कर्मचारियों को बिना किसी विज्ञापन, प्रतियोगी परीक्षा या इंटरव्यू के स्थायी करने का प्रावधान था।
कोर्ट ने कहा कि यह व्यवस्था संविधान के समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए खुली और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है, ताकि सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इन नोटिफिकेशनों में 2018 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया गया था, जो पूरी तरह मनमाना और अनुचित था।

कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा—
“Regularisation cannot become a mode of recruitment. Public employment must comply with constitutional principles of equality and fairness.”
अर्थात नियमितीकरण को भर्ती का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। सरकारी नौकरियों में संविधान के अनुसार समानता और निष्पक्षता जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहा है, तो केवल उसी आधार पर उसे स्थायी नियुक्ति नहीं दी जा सकती, जब तक उसकी नियुक्ति विधिसम्मत प्रक्रिया से न हुई हो।

कर्मचारियों और सरकार पर क्या असर पड़ेगा
इस फैसले के बाद हरियाणा सरकार को अब केवल उन्हीं कर्मचारियों को नियमित करना होगा, जो 16 और 18 जून 2014 की वैध नीति के दायरे में आते हैं।
वहीं, 7 जुलाई 2014 की नीति के तहत नियमित होने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है।
सरकार को अब नई भर्ती प्रक्रियाओं में संवैधानिक नियमों का सख्ती से पालन करना होगा और नियमितीकरण के नाम पर सीधी स्थायी नियुक्तियों से बचना होगा।

कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया
कई कर्मचारी संगठनों ने फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे आंशिक राहत बताया, जबकि कई संगठनों ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं हुआ।
यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार को अब नई स्पष्ट और न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हरियाणा ही नहीं, बल्कि देशभर के अनुबंधित और एडहॉक कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि नियमितीकरण केवल अपवाद हो सकता है, नियम नहीं।
अब सरकारों को नियुक्तियों में पारदर्शिता, समान अवसर और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना होगा। वहीं कर्मचारियों के लिए भी यह फैसला भविष्य की सेवा नीतियों को तय करने वाला साबित होगा।

बाबूगिरी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी ब्यूरो

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