10 साल का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, समर वेकेशन में कार्य जारी रखने और सभी कर्मचारियों को 12 महीने रोजगार देने की उठी मांग
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़,07 जून । गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स, सेक्टर-42 में आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर नया विवाद सामने आया है। कॉलेज में कुछ कर्मचारियों से 15-15 दिन के रोस्टर के तहत काम लिए जाने की चर्चा है, जबकि दूसरी तरफ कई कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया है। इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक सफाई कर्मचारी, माली, चौकीदार, गेम बॉय और कुछ लैब स्टाफ से संबंधित व्यवस्था में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कर्मचारियों का दावा है कि पिछले कई वर्षों में इस तरह की स्थिति नहीं बनी थी, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल 15-15 दिन की ड्यूटी को लेकर उठ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है। ऐसे में यदि कर्मचारियों से आधे महीने काम लिया जाता है तो क्या उन्हें पूरे महीने का वेतन मिलेगा या केवल 15 दिन का? इसको लेकर भी स्पष्टता नहीं है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सेवाओं के लिए अनुमति पूरे वर्ष के आधार पर दी जाती रही है। ऐसे में बिना किसी सार्वजनिक लिखित आदेश के नई व्यवस्था लागू किए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
10 वर्षों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
कर्मचारियों ने कॉलेज प्रशासन से मांग की है कि पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन-किन कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष रिलीव किया जाता रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि पिछले वर्षों में सफाई कर्मचारी, माली, चौकीदार, गेम बॉय और अन्य आउटसोर्स कर्मचारी रिलीव नहीं किए गए थे, तो इस वर्ष उन्हें किस आधार पर कार्यमुक्त किया गया।
कर्मचारियों ने यह भी मांग उठाई है कि उच्च शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़ प्रशासन इस मामले की जांच कर कॉलेज प्रशासन से पिछले 10 वर्षों के संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड तलब करें। कर्मचारियों का आरोप है कि इस बार जिन कर्मचारियों को रिलीव किया गया है, उनके संबंध में कोई स्पष्ट और आधिकारिक लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उनका कहना है कि यदि पिछले एक दशक में ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं थी, तो इस वर्ष अचानक लिए गए निर्णय के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
सभी कर्मचारियों को 12 महीने कार्य देने की मांग
कर्मचारियों ने चंडीगढ़ प्रशासन, उच्च शिक्षा निदेशक तथा कॉलेज प्रशासन से मांग की है कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों से पूर्व की भांति पूरे 12 महीने कार्य लिया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें वर्षभर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें आंशिक अवधि के बजाय नियमित रूप से कार्य और निर्धारित वेतन प्रदान किया जाए, ताकि उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। उनका कहना है कि रोजगार में अनिश्चितता के कारण अनेक परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन और केंद्र सरकार से भी लगाई गुहार
कर्मचारियों ने कॉलेज प्रिंसिपल, उच्च शिक्षा निदेशक, शिक्षा सचिव, वित्त सचिव, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन के प्रशासक, देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा अन्य संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि चंडीगढ़ के सभी सरकारी कॉलेजों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को पूरे 12 महीने कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से विभिन्न कॉलेजों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनके परिवारों की आजीविका इसी रोजगार पर निर्भर है। ऐसे में कर्मचारियों को वर्षभर नियमित रूप से कार्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें।
उन्होंने मांग की है कि सभी कॉलेजों में एक समान नीति लागू कर कर्मचारियों को 12 महीने रोजगार और निर्धारित वेतन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त होगी और वे पूरी निष्ठा के साथ अपने कार्यों का निर्वहन कर सकेंगे।
समर वेकेशन का हवाला देकर कर्मचारियों को रिलीव न किया जाए
कर्मचारियों ने मांग की है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) के दौरान भी सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य करने की अनुमति दी जाए और किसी भी कर्मचारी को केवल समर वेकेशन का हवाला देकर रिलीव न किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि कॉलेज परिसरों में सफाई, सुरक्षा, बागवानी, रखरखाव, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक कार्य वर्षभर चलते रहते हैं, इसलिए कर्मचारियों की सेवाओं की आवश्यकता अवकाश अवधि में भी बनी रहती है।
कर्मचारियों का कहना है कि समर वेकेशन के नाम पर कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की है कि चंडीगढ़ प्रशासन, उच्च शिक्षा निदेशालय और कॉलेज प्रशासन स्पष्ट निर्देश जारी करें कि समर वेकेशन के दौरान भी सभी कर्मचारियों को नियमित रूप से कार्य और वेतन उपलब्ध कराया जाए।
कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को केवल अवकाश अवधि का हवाला देकर रिलीव न किया जाए तथा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को वर्ष के 12 महीने रोजगार की गारंटी दी जाए, ताकि उनके परिवारों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
कर्मचारियों के प्रमुख सवाल
– 15-15 दिन ड्यूटी का आदेश किसने जारी किया?
– क्या इसके लिए कोई लिखित अनुमति मौजूद है?
– कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलेगा या आधे महीने का?
– कुछ कर्मचारियों को रिलीव और कुछ से काम लेने का आधार क्या है?
– पिछले 10 वर्षों में किन कर्मचारियों को रिलीव किया गया था?
– सभी कर्मचारियों को 12 महीने कार्य क्यों नहीं दिया जा रहा?
– समर वेकेशन के दौरान कर्मचारियों को कार्य से वंचित करने का आधार क्या है?
फिलहाल इस मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द स्थिति स्पष्ट करेगा ताकि उनके रोजगार और वेतन को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हो सके। वहीं कर्मचारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, समर वेकेशन के दौरान कर्मचारियों को कार्य पर बनाए रखने तथा सभी कर्मचारियों को 12 महीने रोजगार उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है।













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